दार्जिलिंग: दार्जिलिंग लोकसभा सांसद राजू बिष्ट ने सामाजिक माध्यम पर बताया कि दिसंबर २३ को फांसीदेवा क्षेत्र के झामाकलाल गांव की एक गर्भवती आदिवासी महिला पर अभियुक्त मोहम्मद कादिर अली और उसके सहयोगियों ने निर्ममता से बार-बार हमला किया। इस हमले के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप जनवरी ८ को उसके शिशु का समय से पूर्व जन्म हुआ। हमले के कारण शिशु गंभीर रूप से घायल था और जन्म के तीन दिनों के भीतर ही उसकी मृत्यु हो गई।
स्थानीय निवासियों ने उन्हें बताया कि दिसंबर माह में ही इस अमानवीय घटना के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई थी, किंतु पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिशु की मृत्यु के बाद ही पुलिस ने कदम उठाया, परंतु अब तक केवल एक व्यक्ति को ही गिरफ्तार किया गया है।
आज सांसद ने शोकाकुल परिवार से भेंट कर संवेदना प्रकट की और न्याय की मांग में उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता तथा पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
सामाजिक माध्यम पर सांसद ने आगे बताया कि पीड़ित परिवार ने अपनी पैतृक भूमि के अवैध हस्तांतरण का विरोध किया था, जिसके बाद उन पर यह हमला किया गया। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी परिवार की भूमि का इतनी आसानी से दूसरे के नाम पर हस्तांतरण होना अत्यंत चिंताजनक है। भूमि एवं भूमि-राजस्व विभाग तथा पंजीकरण कार्यालय से जुड़े अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत या गंभीर लापरवाही के बिना ऐसा लेनदेन संभव नहीं है।
सांसद ने कहा कि इस घटना ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं तथा तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है। दार्जिलिंग पहाड़, तराई और डुआर्स क्षेत्र में तेजी से बदलती जनसांख्यिक स्थिति के बीच आदिवासी समुदाय पर बढ़ते अत्याचार अत्यंत चिंता का विषय हैं। आज हमारी बेटियां और बहनें अपने ही घरों में असुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी बहन या बेटी की गरिमा के साथ छेड़छाड़ कभी भी सहन नहीं की जाएगी।
सांसद ने पश्चिम बंगाल सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदिवासी परिवार को न्याय दिलाने में देरी हुई तो समूचे उत्तर बंगाल में आंदोलन फैल सकता है।
अंत में उन्होंने सामाजिक माध्यम के जरिए पश्चिम बंगाल पुलिस से शीघ्र और कठोर कार्रवाई करते हुए सभी दोषियों के विरुद्ध कानून की कठोरतम धाराओं के तहत कदम उठाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय में विलंब के कारण उत्पन्न किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल सरकार की होगी।









