नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस की परेड केवल सैन्य परंपराओं का प्रदर्शन नहीं होती, बल्कि यह भारत की सामरिक सोच, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा संकल्प का सार्वजनिक संदेश भी होती है। इस वर्ष कर्तव्य पथ के ऊपर दिखाई देने वाला ‘सिंदूर फ़ॉर्मेशन’ इसी संदेश को और अधिक सशक्त रूप में प्रस्तुत करेगा। भारतीय वायुसेना द्वारा तैयार किया गया यह विशेष फ़ॉर्मेशन ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को रेखांकित करेगा, जिसमें भारतीय लड़ाकू विमानों ने दुश्मन के आतंकी ठिकानों पर निर्णायक प्रहार किया था।
इस बार के एयरफोर्स फ्लाई पास्ट में भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना के कुल २९ एयरक्राफ्ट भाग लेंगे। इनमें १६ फाइटर जेट, ४ ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ९ हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। यह सहभागिता तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रतीक होगी। सिंदूर फ़ॉर्मेशन में कुल ७ फाइटर जेट शामिल होंगे, जिनमें २ राफेल, २ सुखोई, २ मिग-२९ और १ जगुआर शामिल रहेगा। ये वही अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं, जो भारत की हवाई शक्ति की रीढ़ माने जाते हैं। इन विमानों की एक साथ उड़ान भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक आक्रमण क्षमता को दर्शाएगी।
फ्लाई पास्ट की शुरुआत चार एमआई-१७ हेलीकॉप्टरों के ध्वज फ़ॉर्मेशन से होगी। ये हेलीकॉप्टर तिरंगा और तीनों सेनाओं के ध्वज लेकर सर्वोच्च सेनापति को सलामी देंगे और पुष्प वर्षा करेंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर आधारित ‘प्रहर फ़ॉर्मेशन’ आसमान में दिखाई देगा, जिसमें तीन एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। इसके बाद आसमान में क्रमश विभिन्न फ़ॉर्मेशन उभरेंगे। सबसे पहले टेल फ़ॉर्मेशन, जिसमें सि -१३० और सि -२९५ ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ान भरेंगे। इसके पश्चात कंबाइंड फ़ॉर्मेशन में नौसेना का पी-८आई विमान और वायुसेना के दो सुखोई फाइटर जेट एक साथ उड़ान भरेंगे। इसके बाद वज्र फ़ॉर्मेशन में छह राफेल फाइटर जेट कर्तव्य पथ के ऊपर कतारबद्ध उड़ान भरते दिखाई देंगे।
सिंदूर फ़ॉर्मेशन को लीड करने वाले हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सिंदूर का बैनर लेकर उड़ान भरेंगे, जो इस पूरे फ्लाई पास्ट का केंद्रीय संदेश होगा। कार्यक्रम का समापन वायुसेना द्वारा वर्टिकल चार्ली टच के साथ किया जाएगा, जो गणतंत्र दिवस समारोह का सबसे प्रभावशाली क्षण माना जाता है। ‘सिंदूर फ़ॉर्मेशन’ भारत के बदले हुए सैन्य दृष्टिकोण का प्रतीक है।जहां अब रणनीतिक संयम के साथ निर्णायक शक्ति का स्पष्ट संकेत दिया जाता है। कर्तव्य पथ के ऊपर बनती ये उड़ानें यह भरोसा दिलाएंगी कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और उसकी सेनाएं हर चुनौती के लिए तैयार हैं।











