नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय बल्लेबाज़ स्पिन गेंदबाज़ी के सामने पहले जितने मज़बूत नहीं रहे। गौतम गंभीर की मांग पर बनाई गई टर्निंग पिच ही टीम इंडिया की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई। ईडन गार्डन्स की स्पिन–सहायक पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ संघर्ष करते नज़र आए।
भारतीय दिग्गज स्पिनर आर. अश्विन ने भी स्वीकार किया कि भारतीय बल्लेबाज़ इस समय स्पिन खेल में विश्व के सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी खिलाड़ी भारत में आकर स्पिन का अधिक अभ्यास करते हैं, इसलिए वे अधिक सक्षम दिखते हैं।
अश्विन के अनुसार, भारतीय बल्लेबाज़ तेज़ गेंदबाज़ी को चुनौती मानकर उसके लिए अच्छी तैयारी करते हैं,
“लेकिन स्पिन को लेकर वैसी तैयारी नहीं हो पाती,” यही उनकी कमजोरी बन रही है।
इसी बीच दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों के घरेलू क्रिकेट न खेलने को सबसे बड़ी समस्या बताया।
उनका कहना है, “हमारे खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी खेलते ही नहीं। टर्निंग पिचों पर खेलने की आदत घरेलू क्रिकेट से ही आती है। जब खेलेंगे ही नहीं, तो संघर्ष तो होगा ही।”
उन्होंने टीम इंडिया के वर्कलोड मैनेजमेंट पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि “खिलाड़ी सिर्फ तब रणजी खेलते हैं जब उनका फ़ॉर्म गिर जाता है। बाकी समय वर्कलोड का बहाना बनाकर दूर रहते हैं।”
गावस्कर का मानना है कि यदि भारत को स्पिन पिचों पर भरोसेमंद बल्लेबाज़ तैयार करने हैं, तो चयनकर्ताओं को घरेलू क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को ज्यादा महत्व देना चाहिए।
एक समय स्पिन आक्रमण के खिलाफ दुनिया की सबसे मज़बूत टीम मानी जाने वाली भारत अब उसी विभाग में पिछड़ती दिख रही है। गंभीर की टर्निंग पिच रणनीति के उल्टा पड़ना इसका ताज़ा उदाहरण है।











