नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पूरी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष मामला रखा। सिब्बल ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी कर पीठ के आदेशों से अलग निर्देश दिए हैं।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी किसी भी बाहरी प्रभाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, “हम अपने न्यायिक अधिकारियों को जानते हैं, वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे।” अदालत ने दोहराया कि किन दस्तावेजों की जांच होनी है, यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है।
पीठ ने यह भी कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार अदालत के आदेशों का उल्लंघन करेगी।
२० फरवरी का असाधारण निर्देश
२० फरवरी को शीर्ष अदालत ने एक असाधारण आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल में विवादित मतदाता सूचियों की एसआईआर प्रक्रिया में सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति का निर्देश दिया था।
२४ फरवरी को अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ८० लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए दीवानी न्यायाधीशों की नियुक्ति करने तथा पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी थी।










