एक दशक से रोशनी को तरस रही बांगल के साहित्यकार शरत चंद्र की मूर्ति

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कोलकाता: अपने साहित्य से लोगों के जीवन में रोशनी भरने वाले बांग्ला के प्रमुख साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की मूर्ति एक दशक से प्रकाश के लिए संघर्ष कर रही है। प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री पुलक राय और सांसद व पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी प्रसून बनर्जी के प्रयास से अब यह मूर्ति कुछ ही दिनों में जगमगाने वाली है। उनके उपन्यास के आधार बनी फिल्म देवदास हिन्दी सिनेमा में काफी लोकप्रियता हासिल कर चुकी है। देवदास उपन्यास के रचयिता शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की यह मूर्ति हावड़ा स्टेशन के पास हावड़ा बस डिपो रोड क्षेत्र में है। हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी शरत चंद्र की मूर्ति और आसपास के क्षेत्रों को प्रकाशमय बनाने के लिए एक दशक पहले अपने सांसद फंड से हाईमॉस्ट लाइट लगावाई, लेकिन हावड़ा नगर निगम और केएमडीए के बीच समन्वय के अभाव में अभी तक इसमें बिजली का प्रवाह नहीं हो पाया है। कुछ तकनीकी कारणों से बिजली नहीं आ पायी। इसकी सूचना मिलने पर बुधवार को पीडब्ल्यूडी मंत्री पुलक राय ने काफी सक्रियता दिखाई और अपने विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बिजली कनेक्शन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपने विभाग के प्रमुख अभियंता से कहा कि हर हाल में इस महीने इस समस्या का समाधान हो जाना चाहिए।
यह है समस्या
हाईमॉस्ट लाइट को प्रकाशित करने के लिए ली जाने वाली बिजली का खर्च वहन कौन करेगा। यह एक बड़ा सवाल हावड़ा नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के सामने है। यही नहीं बिजली के तार अंडर ग्राउंड बिछाए जाएंगे या ओवर हेड तार लगाकर काम चलाया जाएगा। इस पर भी अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है क्योंकि जहां मूर्ति स्थापित की गई है, वह जगह पीडब्ल्यूडी की है। लेकिन आसपास के क्षेत्र हावड़ा नगर निगम के अधीन है। जमीन खोदने के लिए भी पीडब्ल्यूडी के साथ ही हावड़ा नगर निगम प्रबंधन की अनुमति आवश्यक है।
बिजली खर्च देने को तैयार
सूत्रों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग बिजली खर्च देने के लिए तैयार हो गया है। हावड़ा नगर निगम से हरी झंडी मिलते ही जमीन खोदकर अंडर ग्राउंड बिजली के तार बिछाए जाएंगे। इस संबंध में पुलक राय का कहना है कि शरत चंद्र चट्टोपाध्याय बांग्ला साहित्यकार जरूर हैं, लेकिन उनके उपन्यास पर बनी हिंदी फिल्म देवदास ने भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति अर्जित की है। उन्होंने अपने साहित्य से समाज, प्रेम और मानवीय रिश्तों की गहराई को उजागर किया है। देवदास के अलावा पल्लीसमाज, श्रीकांत, चरित्रहीन, गृहदाह, पाथेर दवाई, दत्ता, देना पाओना, शुभदा उनके प्रमुख उपन्यास हैं।

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