शिलिगुड़ी: उत्तर बंगाल के ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों की हालत देखकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। वहां की चिकित्सा व्यवस्था लगातार और भी बदतर होती जा रही है। मरीज इन अस्पतालों में जाना नहीं चाहते। यहां तक कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी अस्पताल जाने से कतराते हैं।
कई मरीजों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर घंटों-घंटों इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टर कब आएंगे, यह जानने के लिए एक दिन पहले ही पूछताछ करनी पड़ती है। अगर हम जाते भी हैं, तो पूरा दिन का काम खराब हो जाता है, और फिर भी यह तय नहीं होता कि अस्पताल में सेवा मिलेगी या नहीं।
ग्रामीण इलाकों में जाकर स्थिति और स्पष्ट हो जाती है। डॉक्टर दवा लिख तो देते हैं, लेकिन वह दवा पाना मरीजों के लिए एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कई मरीजों ने बताया कि परिवार के किसी सदस्य की तबीयत खराब होने पर वे गंभीर चिंता में पड़ जाते हैं, क्या होगा, क्या नहीं होगा।
कई लोगों का कहना है कि दिन-पर-दिन इस तरह की स्थिति सहते-सहते अब सब कुछ सहने की आदत हो गई है। हमें अब भरोसा नहीं रहा कि ये अस्पताल कभी ठीक होंगे। बेहतर चिकित्सा व्यवस्था कब होगी, यह तो समय ही बताएगा, ऐसा कहना है स्थानीय मरीजों का।











