आर्टेमिस-२ मिशन: ५० साल बाद मानवयुक्त चंद्र यात्रा की शुरुआत, चार अंतरिक्ष यात्री रवाना

nasa-misson

वॉशिंगटनः अमेरिका से चार अंतरिक्ष यात्री बुधवार को चंद्रमा की ओर रवाना हुए, जो 50 वर्ष से अधिक समय बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है। यह मिशन नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) की उस दीर्घकालीन योजना की शुरुआत है, जिसके तहत अगले दो वर्षों में चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य रखा गया है।
अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री को लेकर ३२ मंजिला आर्टेमिस-२ रॉकेट ने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए हजारों लोग मौके पर मौजूद थे, जबकि आसपास की सड़कें और समुद्र तट भी दर्शकों से भर गए। यह दृश्य १९६० और ७० के दशक के अपोलो अभियानों की याद दिलाता है।
यह मिशन चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इसी प्रक्षेपण स्थल से पहले अपोलो मिशनों के तहत भी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा भेजा गया था।
मिशन के कमांडर रीड वाइज़मैन ने “चलो चांद पर चलते हैं!” के उद्घोष के साथ उड़ान का नेतृत्व किया। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह अब तक का सबसे विविध अंतरिक्ष दल है, जिसमें पहली बार एक महिला, एक अश्वेत व्यक्ति और एक गैर-अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।
कैप्सूल से चंद्रमा के पास से गुजरेंगे
अंतरिक्ष यात्री १० दिन की परीक्षण उड़ान पर हैं। प्रारंभिक २५ घंटे वे पृथ्वी की कक्षा में रहकर कैप्सूल की जांच करेंगे, इसके बाद मुख्य इंजन उन्हें चंद्रमा की ओर ले जाएगा। वे चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके पास से गुजरते हुए लगभग ६,४०० किलोमीटर आगे जाकर वापसी करेंगे और अंततः प्रशांत महासागर में उतरेंगे। इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर तक जाने वाले अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे।
आठ दिन की यात्रा पर दुनिया की नजर
यह मिशन आर्टेमिस-१ के तीन साल बाद हो रहा है, जिसमें कोई मानव सवार नहीं था। आर्टेमिस-२ में पहली बार जीवन रक्षक प्रणाली, पानी की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जोखिम भी बढ़ गया है। इसी कारण नासा ने मिशन के हर चरण को सावधानीपूर्वक परीक्षण के साथ आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

About Author

Advertisement