आज का इतिहास: मारकोनी की रेडियो क्रांति से विश्व रंगमंच दिवस तक, २७ मार्च की अहम घटनाएँ

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नई दिल्ली: इतिहास के पन्नों में २७ मार्च का दिन अनेक महत्वपूर्ण और यादगार घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन जहाँ विश्व रंगमंच दिवस की शुरुआत हुई, वहीं कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और दुखद घटनाएँ भी सामने आईं। यह दिन कला, विज्ञान और वैश्विक इतिहास के कई अहम मोड़ों का साक्षी रहा है।
सबसे पहले ४७ ईसा पूर्व में मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा सप्तम थिया फिलोपेटर ने अपने रोमन सहयोगी जूलियस सीज़र की मदद से पुनः सत्ता हासिल की थी।
वर्ष १६६८ में इंग्लैंड के शासक चार्ल्स द्वितीय ने बंबई (वर्तमान मुंबई) को ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था, जो आगे चलकर भारत में औपनिवेशिक शासन के विस्तार का एक बड़ा आधार बना।
वर्ष १८५५ में अब्राहम गेस्नर ने मिट्टी के तेल का पेटेंट प्राप्त किया, जिसने ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा।
वर्ष १८९८ में आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले सर सैयद अहमद खान का निधन हुआ।
२७ मार्च १८९९ को महान आविष्कारक गुलिएल्मो मारकोनी ने फ्रांस और इंग्लैंड के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय रेडियो प्रसारण सफलतापूर्वक किया, जो संचार क्रांति की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि थी।
वर्ष १९३३ में जापान ने राष्ट्र संघ से स्वयं को अलग कर लिया, जो वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान २७ मार्च १९४४ को लिथुआनिया में नाजियों ने लगभग २,००० यहूदियों की हत्या कर दी, जो मानव इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में से एक है।
वर्ष १९६१ में पहली बार विश्व रंगमंच दिवस मनाया गया, जिसकी शुरुआत अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान ने की थी। यह दिन रंगमंच कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष मनाया जाता है।
१९७७ में स्पेन के टेनेरीफ द्वीप पर दो बड़े विमान टकरा गए, जिसमें ५८३ लोगों की मौत हो गई। यह इतिहास की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है।
१९९० में पश्चिम बंगाल के निंपुरा में एक यात्री बस पुल से गिरकर बिजली के तारों में फँस गई, जिससे हुए विस्फोट में ४१ लोगों की मौत हो गई और २१ अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।
वर्ष १९९८ में अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दवा निर्माता कंपनी फाइजर की दवा वियाग्रा को नपुंसकता के उपचार के लिए मंजूरी दी।
वर्ष २०१० में भारत ने ओडिशा के चांदीपुर में परमाणु क्षमता से लैस प्रक्षेपास्त्र धनुष और पृथ्वी-२ का सफल परीक्षण किया।
२०११ में जापान के फुकुशिमा में भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्र में सामान्य से कई गुना अधिक रेडियोधर्मी विकिरण पाया गया, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई थी।
वर्ष २०२२ में बहरीन के अदलिया शहर में हिजाब पहने महिला को प्रवेश न देने के आरोप में एक भारतीय भोजनालय को बंद कर दिया गया था।
२७ मार्च का दिन इस प्रकार इतिहास में उपलब्धियों, संघर्षों और चेतावनी देने वाली घटनाओं का संगम है, जो हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय करने की प्रेरणा देता है।

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