आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में बालेन शाह, महेश बस्नेत और हर्क साम्पाङ सहित को नोटिस

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झापा: निर्वाचन आचारसंहिता के उल्लंघन के मामलों में चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने, स्पष्टीकरण मांगने और निगरानी तेज करने जैसे कदम उठाए हैं। केंद्रीय आचारसंहिता निगरानी समिति के संयोजक एवं चुनाव आयुक्त सगुन शम्शेर जबरा ने बीबीसी को बताया कि सोशल मीडिया से जुड़ी गतिविधियों पर दैनिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस निगरानी तंत्र में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस के अधिकारी और साइबर मामलों के विशेषज्ञ शामिल हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से घृणास्पद अभिव्यक्तियों का प्रसार आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
फागुन २१ को होने वाले आम चुनाव के लिए ४ माघ की रात १२ बजे से आचारसंहिता लागू कर दी गई है।
लगातार जारी हो रहे नोटिस
आचारसंहिता के उल्लंघन के आरोप में आयोग ने हाल के दिनों में कई राजनीतिक नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है। इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन शाह को नोटिस जारी किया गया।
झापा–५ से उम्मीदवार शाह द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी को लेकर आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा है। यह टिप्पणी एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया के रूप में की गई थी, जिसे आपत्तिजनक बताया गया है।
इसी दिन आयोग ने एमाले नेता महेश बस्नेत, धरान के मेयर हर्क साम्पाङ और स्वतंत्र उम्मीदवार कमल भुसाल (डॉ. निकोलस भुसाल) को भी नोटिस भेजा।
महेश बस्नेत पर मधेसी समुदाय के खिलाफ घृणास्पद और नस्लवादी टिप्पणी करने का आरोप है। हर्क साम्पाङ पर चुनाव प्रचार में बच्चों के उपयोग और भुसाल पर दो चुनाव चिह्नों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी
चुनाव आयोग ने व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से आचारसंहिता उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था की है। आयोग के अनुसार ७७ जिलों में साइबर पुलिस तैनात कर सोशल मीडिया की निगरानी की जा रही है।
फर्जी खबरें, एआई से बने डीपफेक वीडियो, नफरत फैलाने वाली सामग्री, क्लिकबेट और स्वचालित बॉट्स पर रोक लगाने की नीति अपनाई गई है। ‘पल्स’ नामक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए विशेष कीवर्ड्स के आधार पर निगरानी की जा रही है।
सजा का प्रावधान
आचारसंहिता के उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक जुर्माना या उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। गंभीर मामलों में निर्वाचन अपराध एवं सजा अधिनियम, २०७३ के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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