आइटम गीत के नाम पर शरीर की बिक्री, शबाना आज़मी का विस्फोटक बयान

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मुम्बई: क्या हिन्दी चलचित्र जगत के पर्दे के पीछे वास्तव में गंदी पुरुषप्रधान मानसिकता छिपी हुई है, जहाँ एक अभिनेत्री को केवल एक ‘वस्तु’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है? हाल ही में मुम्बई के एक कार्यक्रम में आइटम गीतों को लेकर ऐसा ही एक तीखा बयान देकर वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी ने हलचल मचा दी है। उनका स्पष्ट कहना है कि आइटम नृत्य का अर्थ है पुरुषों की वासना के सामने स्त्री का बिना शर्त आत्मसमर्पण।
शबाना आज़मी हमेशा से ही बेबाक रही हैं। मुम्बई में आयोजित ‘वी द वीमेन’ नामक कार्यक्रम में उन्होंने आइटम गीतों के पीछे छिपे कुरूप पक्ष को सामने रखा। उनके अनुसार इन गीतों में जिस प्रकार कैमरा चलाया जाता है, उससे ही निर्देशक का वास्तविक उद्देश्य समझ में आ जाता है।
शबाना ने प्रश्न उठाया, “जब कैमरे में शरीर के विशेष अंगों जैसे वक्ष या नाभि को उभार कर दिखाया जाता है, तब क्या उसमें कोई कला रह जाती है? कैमरा जिस तरह शरीर पर घूमता है, उससे स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ स्त्रीत्व को नहीं, बल्कि शरीर को वस्तु के रूप में दिखाने की कोशिश की जा रही है।” इसे उन्होंने ‘पुरुष दृष्टि’ बताया।
हालाँकि उन्होंने केवल चलचित्रों को ही नहीं, बल्कि समाज की रुचि पर भी प्रश्न उठाया। शबाना ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज छोटे-छोटे बच्चे भी ‘चोली के पीछे’ जैसे गीतों पर गाते-नाचते हैं और बड़े लोग ताली बजाकर हँसते हैं। उनके शब्दों में, “कोई भी गीत के शब्दों पर ध्यान नहीं देता। बच्चे क्या गा रहे हैं, यह किसी की चिंता का विषय नहीं है। सब केवल उसकी धुन पर झूमने में व्यस्त हैं।”
उनके अनुसार यदि पुरुष स्वयं को वस्तु बनाने के लिए तैयार हैं, तो महिलाओं को उसी मार्ग पर चलने की आवश्यकता क्यों है? केवल शरीर दिखाकर ही लोकप्रियता क्यों प्राप्त करनी पड़े?
चलचित्रों के इतिहास में आइटम गीत हमेशा से लोकप्रिय रहे हैं, लेकिन शबाना ने याद दिलाया कि अधिकांश मामलों में इन गीतों का चलचित्र की कहानी से कोई संबंध नहीं होता। इन्हें केवल दर्शकों को सस्ता मनोरंजन देने के लिए जबरन चलचित्र में जोड़ा जाता है।
वर्तमान में यह वरिष्ठ अभिनेत्री विकास खन्ना की चलचित्र ‘इमैजिनरी रेन’ में कार्य कर रही हैं। अभिनय के साथ-साथ आइटम संस्कृति के विरुद्ध उनके इस बयान ने हिन्दी चलचित्र जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। अब प्रश्न उठ रहा है कि क्या शबाना आइटम नृत्य करने वाली अभिनेत्रियों की आजीविका पर प्रश्न उठा रही हैं, या वास्तव में स्त्री सम्मान की रक्षा के लिए आवाज़ बुलंद कर रही हैं। हालाँकि उनके अनेक प्रशंसक उनके पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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