गुवाहाटी: कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने दावा किया है कि प्रदेश कांग्रेस अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है। उनके अनुसार धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन ही असम कांग्रेस के “मुख्य कर्ताधर्ता” हैं।
पीटीआई को दिए साक्षात्कार में बोरा ने कहा कि गौरव गोगोई अब केवल “पार्टी का चेहरा” भर हैं। उन्होंने कहा, “धुबरी सीट पर १० लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज करने वाले रकीबुल हुसैन ही पार्टी के वास्तविक कर्ताधर्ता हैं।”
बोरा ने बताया कि सोमवार को उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेजा था। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें फोन कर वर्ष २००७ से दोनों के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। बोरा का दावा है कि राहुल गांधी ने पार्टी को आगे बढ़ाने में उनके योगदान का उल्लेख किया, लेकिन इस्तीफे के मुद्दे पर कोई बात नहीं की।
इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की और घोषणा की कि बोरा २२ फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे।
बोरा ने यह भी कहा कि २०२४ में पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले यह सहमति बनी थी कि बेहाली सीट से भाकपा (माले) का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा, क्योंकि पिछले चुनाव में उसे लगभग ४० हजार वोट मिले थे। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रस्ताव पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने विचार नहीं किया और अंततः ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जो उस समय पार्टी का सदस्य भी नहीं था।
उन्होंने कहा कि गठबंधन के अन्य दलों के नेताओं ने उनसे कहा था कि यदि पांच में से एक सीट भी नहीं छोड़ी जा सकती, तो १२६ सीटों पर भविष्य की चर्चा कैसे होगी। इसी कारण उन्होंने नैतिक आधार पर गठबंधन के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव में बुरी तरह पराजित हुआ।
बोरा ने यह भी कहा कि उन्होंने यह मुद्दा कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उठाया था, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। साथ ही, उन्हें व्यक्तिगत अपमान का भी सामना करना पड़ा, हालांकि उन्होंने इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार किया।










