नई दिल्ली: असम में चुनाव प्रचार समाप्त होने के अंतिम दिन एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नाम पर एक फर्जी पत्र सार्वजनिक किया गया है। उक्त पत्र को कथित रूप से संघ प्रमुख द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा हुआ बताया गया है।
असम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा आरएसएस और भाजपा के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सामने आए इस फर्जी पत्र को कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ के प्रचार विभाग के पूर्व पदाधिकारी तथा सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने इसकी कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से संघ के स्वयंसेवक या जागरूक लोग प्रभावित नहीं होते। लेकिन चुनावी लाभ के लिए संघ पर अनावश्यक हमला करने से कांग्रेस स्वयं कमजोर होती जा रही है। जनता ऐसी घटिया मानसिकता को अस्वीकार कर रही है।
बताया गया है कि संघ के लेटरहेड और संघ प्रमुख के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग कर तैयार किए गए इस पत्र की भाषा इतनी निम्नस्तरीय है कि कोई भी सामान्य समझ वाला व्यक्ति इसे तुरंत खारिज कर सकता है। पत्र में संघ की असंतुष्टि दर्शाने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री से असम भाजपा और मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों पर ध्यान देने की बात कही गई है।
राजीव तुली ने इसे हास्यास्पद और शर्मनाक असफल प्रयास बताया। उनके अनुसार, यह कार्य कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक समूह द्वारा किया गया हो सकता है, लेकिन वे संघ की कार्यप्रणाली को समझने में विफल रहे हैं। संघ कभी भी पत्र या सार्वजनिक माध्यम से किसी संगठन को निर्देश नहीं देता, बल्कि संवाद और समन्वय के माध्यम से कार्य करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी इस प्रकार के फर्जी दस्तावेज जारी कर अपनी संभावित चुनावी हार और भय को प्रकट कर रहे हैं। साथ ही यह भी प्रश्न उठता है कि उनके पास मुद्दों और जनसमर्थन की कमी है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कई मंचों से कहा है कि भारत में हिंदू और मुस्लिम का डीएनए एक ही है। उनके अनुसार, दोनों के पूर्वज समान हैं, केवल पूजा-पद्धति और जीवनशैली में अंतर है। संघ लगातार मुस्लिम समाज के साथ संवाद कर राष्ट्रीय हित में सहयोग का आह्वान करता रहा है।










