अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद अलीरेज़ा आराफी बने ईरान केअंतरिम सर्वोच्च नेता

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दुबई: अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। देश की सर्वोच्च संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने ६७ वर्षीय अयातुल्ला अलीरेज़ा आराफी को अंतरिम सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी सौंपी है।
आराफी, ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के उपाध्यक्ष हैं, जो देश के सर्वोच्च नेता की नियुक्ति के लिए संवैधानिक रूप से अधिकृत निकाय है। वे पहले ‘गार्जियन काउंसिल’ के सदस्य भी रह चुके हैं और वर्तमान में ईरान की धार्मिक सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं।
‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ एक 88 सदस्यीय निकाय है, जिसमें केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं। इनका चुनाव हर आठ वर्ष में जनमत से होता है। ईरान के संविधान के अनुसार, यही संस्था नए सर्वोच्च नेता का चयन करती है।
‘एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल’ के प्रवक्ता मोहसेन देहनवी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि आराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद में शामिल किया गया है। वे अब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख घोलामहुसैन मोहसेनी एजेई के साथ मिलकर नेतृत्व संभालेंगे।
ईरान में सर्वोच्च नेता सशस्त्र बलों और ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ का कमांडर-इन-चीफ होता है। ईस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स(आईआरजीसी) को अमेरिका ने २०१९ में आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
१९७९ की इस्लामी क्रांति के बाद यह दूसरी बार है जब देश में सर्वोच्च नेता का उत्तराधिकार तय किया जाएगा। १९८९ में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को यह पद मिला था।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराधिकार की प्रक्रिया बंद दरवाजों के पीछे आगे बढ़ेगी। इससे पहले राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन मई २०२४ में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई का नाम भी चर्चा में है, हालांकि उन्होंने कोई औपचारिक सार्वजनिक पद नहीं संभाला है।

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