अपोलो कैंसर सेंटर, कोलकाता ने विश्व कैंसर दिवस पर ‘ज़ीरो टू हीरो’ अभियान शुरू किया

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कोलकाता: विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कोलकाता के अपोलो कैंसर सेंटर ने ‘ज़ीरो टू हीरो’ अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य स्टेज ज़ीरो कैंसर की पहचान, बेहतर जीवन-रक्षा और स्वस्थ होने की संभावनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
संसद में प्रस्तुत आईसीएमआर-एनसीआरपी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष २०२४ में १५ लाख से अधिक नए मामलों की पहचान की गई और यह संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। वर्तमान में हर नौ में से एक भारतीय का जीवन जोखिम में है, जिससे कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गया है। इसके बावजूद ७०% से अधिक मामले अंतिम चरण (स्टेज III/IV) में ही पहचान में आते हैं, जब इलाज कठिन हो जाता है, परिणाम कमजोर होते हैं और परिवारों पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता है।
इसी चिंताजनक प्रवृत्ति के जवाब में, आपोलो कैंसर सेंटर, कोलकाताका ‘ज़ीरो टू हीरो’ अभियान स्टेज ज़ीरो पर पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप के जीवन-परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करता है। यह पहल उन लोगों को सम्मानित करती है जिन्होंने समय रहते कदम उठाया और जागरूकता, उपचार तक पहुंच तथा त्वरित चिकित्सा के माध्यम से ‘हीरो’ बनकर उभरे। यद्यपि प्रत्येक कैंसर अलग होता है:मस्तिष्क, स्तन, गला, फेफड़े, अग्न्याशय, लिवर आदि—लेकिन इनसे उबरने वाले लोगों की एक समान विशेषता है: प्रारंभिक पहचान। उनकी सामूहिक यात्रा यह सिद्ध करती है कि समय पर जांच जीवन बचा सकती है।
आपोलो हॉस्पिटल्स ईस्टर्न रीजन के सीईओ श्री राणा दासगुप्ता ने कहा, “प्रारंभिक पहचान केवल उपचार की प्राथमिकता नहीं है, यह पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आंकड़े लगातार बताते हैं कि अंतिम चरण की तुलना में प्रारंभिक चरण के कैंसर में रोग-मुक्त और दीर्घकालिक जीवित रहने की दर कहीं अधिक होती है। कोलकाता के आपोलो कैंसर सेंटर में हम इलाज से आगे बढ़कर रोकथाम और प्रारंभिक पहचान पर जोर देते हैं। प्रारंभिक स्तर पर मामलों की पहचान हमारे कैंसर रजिस्ट्रियों को मजबूत करती है, शीघ्र उपचार का मार्ग प्रशस्त करती है और मरीज को रोग-निदान से स्वस्थ जीवन की ओर ले जाती है। यह दृष्टिकोण कैंसर उपचार को प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय नियंत्रण में बदल सकता है।”
आपोलो हॉस्पिटल्स, ईस्टर्न रीजन के मेडिकल सर्विसेज निदेशक श्री सुरिंदर सिंह भाटिया ने कहा, “कैंसर तीसरे या चौथे चरण में अचानक शुरू नहीं होता, यह अक्सर लक्षण दिखने से पहले ही विकसित होने लगता है। ‘ज़ीरो टू हीरो’ अभियान के माध्यम से हम अंतिम चरण के उपचार को प्रारंभिक जीत में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। जब स्टेज ज़ीरो या स्टेज-I में कैंसर की पहचान होती है, तब उपचार सरल होता है, परिणाम बेहतर होते हैं और जीवन शीघ्र सामान्य हो सकता है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को समय रहते कदम उठाने, प्रश्न पूछने और बिना भय आगे आने के लिए सशक्त बनाना है।”
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सैकत गुप्ता, सलाहकार डॉ. सुप्रतीम भट्टाचार्य और डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा, “हम प्रतिदिन देखते हैं कि प्रारंभिक पहचान कितना बड़ा अंतर पैदा करती है। शुरुआती चरण में कैंसर का पता चलने पर उपचार कम आक्रामक, अधिक प्रभावी और जीवित रहने की दर उल्लेखनीय रूप से बेहतर होती है। विलंबित पहचान यात्रा को जटिल बना देती है। प्रारंभिक हस्तक्षेप न केवल स्वास्थ्य-सुधार को बेहतर करता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बनाए रखता है।”
मेडिकल ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. जयदीप घोष ने कहा, “‘ज़ीरो टू हीरो’ अभियान का मूल सत्य यह है कि मरीज ही असली नायक हैं। जब लोग जागरूकता को प्राथमिकता देते हैं, नियमित जांच कराते हैं और शुरुआती लक्षणों पर ही उपचार शुरू करते हैं, तब वे कैंसर को हराने का सबसे मजबूत अवसर पाते हैं।”
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तनवीर शाहिद ने कहा, “प्रारंभिक चरण में कैंसर की पहचान होने पर रेडिएशन थेरेपी सबसे अधिक प्रभावी होती है। आधुनिक इमेजिंग तकनीकों ने उपचार को बदल दिया है। स्टेज ज़ीरो या स्टेज-I में हम अत्यधिक लक्षित उपचार दे सकते हैं, जिससे कठिन सर्जरी या कीमोथेरेपी की आवश्यकता कम हो सकती है और दीर्घकालिक परिणाम बेहतर होते हैं।”
कैंसर से उबर चुकीं मरीज मिलि मंडल ने कहा, “जब मुझे कैंसर का पता चला, यह शब्द ही डरावना था। लेकिन समय पर पहचान ने सब बदल दिया। मेरा उपचार आसान रहा, मैं जल्दी स्वस्थ हुई और जीवन कभी ठहरता हुआ नहीं लगा। ‘ज़ीरो टू हीरो’ जैसे अभियान याद दिलाते हैं कि कैंसर का अर्थ हमेशा भय नहीं होता; समय पर कदम उठाने से यह आशा में बदल सकता है।”

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