मणिपुर: युवा और खेलकूद क्षेत्र में व्यापक बदलाव की तैयारी, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और प्रतिभा पहचान पर ज़ोर

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इम्फाल(देवेंद्र के ढुंगाना) भारत के मणिपुर राज्य ने युवा सशक्तीकरण और खेलकूद के विकास को नई दिशा देने के लिए युवा एवं खेलकूद संबंधी नीतियों में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल प्रतिभाओं की पहचान, व्यावसायिक करियर विकास और समावेशी भागीदारी को प्राथमिकता देते हुए राज्य युवाओं की क्षमता बढ़ाने तथा खेलकूद क्षेत्र के संस्थागत विकास के लिए एक नया नीतिगत आधार तैयार करने की दिशा में प्रयासरत है।
इसी उद्देश्य से मणिपुर राज्य युवा नीति, २०२६ और मणिपुर राज्य खेलकूद नीति, २०२६ पर दो दिवसीय परामर्श बैठक शुक्रवार को इम्फाल स्थित खुमान लाम्पाक खेल परिसर में इंडोर स्टेडियम के सामने बने कैंटीन हॉल में शुरू हुई। राज्य के युवा मामले एवं खेलकूद विभाग द्वारा आयोजित इस बैठक का उद्देश्य संबंधित हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर वर्तमान आवश्यकताओं और चुनौतियों के अनुरूप नीतियों का निर्माण करना है।
प्रस्तावित नीतियों में युवाओं के सर्वांगीण विकास और खेलकूद को व्यवस्थित, वैज्ञानिक तथा अवसरों से परिपूर्ण बनाने पर विशेष ज़ोर दिए जाने की उम्मीद है। विशेष रूप से खिलाड़ियों की प्रतिभा की समय रहते पहचान करना, उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण एवं बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना और खेलकूद को केवल प्रतिस्पर्धा या पदक हासिल करने तक सीमित न रखकर दीर्घकालीन व्यावसायिक संभावनाओं से जोड़ना महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
खेलकूद में क्षमता रखने वाले अनेक युवा उचित प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों के अभाव में अपनी प्रतिभा का पूर्ण प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्पष्ट नीतियों, संस्थागत समन्वय और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता होती है। मणिपुर में शुरू की गई नीतिगत परामर्श प्रक्रिया को भी इन्हीं आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मणिपुर खेल प्रतिभाओं के लिए एक परिचित राज्य है। यहाँ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। हालाँकि, खेलकूद के क्षेत्र में स्थापित इस पहचान को दीर्घकालीन उपलब्धियों में बदलने के लिए केवल प्रतिभाओं को सामने लाना पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों के निरंतर विकास, स्वास्थ्य एवं शारीरिक क्षमता की वैज्ञानिक निगरानी, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और खेल जीवन के बाद करियर प्रबंधन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
समकालीन खेलकूद में सफलता केवल खिलाड़ी की व्यक्तिगत मेहनत पर निर्भर नहीं करती। प्रशिक्षकों की दक्षता, खेल विज्ञान का उपयोग, संतुलित पोषण, मानसिक तैयारी, आधुनिक तकनीक और नियमित प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। इसलिए नई खेलकूद नीति में इन पहलुओं को किस प्रकार शामिल किया जाता है, यह उसकी प्रभावशीलता का आकलन करने का एक महत्त्वपूर्ण आधार होगा।
इसी तरह, युवा विकास को केवल खेलकूद तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षा, कौशल विकास, रोज़गार, उद्यमशीलता, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक भागीदारी को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक है। युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता का उत्पादक क्षेत्रों में उपयोग सुनिश्चित होने पर वे न केवल व्यक्तिगत रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
समावेशी भागीदारी भी प्रस्तावित नीति का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं, आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों तथा पर्याप्त अवसरों से वंचित समूहों तक प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रमों की पहुँच सुनिश्चित की जा सके, तो खेलकूद का आधार व्यापक बन सकता है। समान अवसरों की उपलब्धता के बिना प्रतिभा पहचान और खेलकूद विकास के लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन होगा।
दो दिवसीय परामर्श बैठक में प्राप्त सुझावों से मणिपुर के युवा एवं खेलकूद क्षेत्र की प्राथमिकताएँ निर्धारित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, किसी भी नीति की वास्तविक सफलता केवल उसमें शामिल प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त बजट, संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही और नियमित निगरानी पर भी निर्भर करती है।
मणिपुर की यह पहल युवा विकास और खेलकूद को अलग-अलग क्षेत्रों के रूप में देखने के बजाय उन्हें एक-दूसरे से जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन के माध्यमों के रूप में आगे बढ़ाने की संभावना प्रस्तुत करती है। अब सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या यह पहल केवल नीतियों के निर्माण तक सीमित रहेगी या इन्हें स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू कर युवाओं को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने वाला वातावरण भी तैयार किया जाएगा।
यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समावेशी अवसरों और दीर्घकालीन योजनाओं को व्यावहारिक रूप दिया जाता है, तो मणिपुर अपने युवा सामर्थ्य और खेल प्रतिभाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से विकसित करने की दिशा में ठोस आधार तैयार कर सकता है।

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