शिलांग: मेघालय की महिला किसानों ने कृषि उत्पादन और अपनी आजीविका में सुधार लाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज तथा रियायती दरों पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
उमियम स्थित उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसंधान परिसर में गुरुवार को आयोजित राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के कार्यक्रम में महिला किसानों ने यह मांग उठाई। कार्यक्रम में एक सौ से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया।
आईसीएआर–उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रीय अनुसंधान परिसर और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), री-भोई के संयुक्त तत्वावधान में एम.एस. स्वामीनाथन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान, उनकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने तथा कृषि संबंधी निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवाद सत्र में महिला किसानों ने बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की सहज उपलब्धता को आवश्यक बताया। उन्होंने आईसीएआर के माध्यम से कृषि उपकरण रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की भी मांग की।
आईसीएआर–उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रीय अनुसंधान परिसर के प्रभारी निदेशक डॉ. पंकज बैसवर ने किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत कृषि पद्धतियों और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि महिला किसानों को कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे उनकी आय बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
बैसवर ने महिला सशक्तीकरण के प्रति पुरुष किसानों को भी जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कृषि संबंधी निर्णय लेने और उद्यमशील गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना जरूरी है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं री-भोई क्षेत्र कल्याण संघ (रावा) की अध्यक्ष बालाकिन्तिव उम्बाह ने महिला किसानों से अपने काम पर गर्व करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने पेशे के कारण स्वयं को कमतर नहीं समझना चाहिए और न ही किसी के द्वारा अपने काम को कम महत्व दिए जाने पर हतोत्साहित होना चाहिए।
उन्होंने महिला किसानों की दोहरी जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कृषि कार्यों के साथ-साथ घरेलू कामकाज और परिवार की देखभाल भी करती हैं। समाज के प्रति उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने महिलाओं की भूमिका की सराहना की।
इससे पहले, आईसीएआर–कृषि विज्ञान केंद्र, री-भोई के प्रमुख एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम.डी. मोकीदुल इस्लाम ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने इस अवसर के महत्व और इस वर्ष की विषयवस्तु ‘विकसित कृषि और विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका’ पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों को खेती में सहायता के उद्देश्य से सब्जियों के बीज, आईपीएफडी १९-३ किस्म के मटर के बीज, जैव उर्वरक तथा कृषि संबंधी साहित्य वितरित किए गए।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि महिला किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री, आधुनिक तकनीक और आवश्यक प्रशिक्षण तक उनकी आसान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। ऐसी पहल से महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि विकास और आजीविका में सुधार लाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।





