जनजागरूकता अभियान सकारात्मक, निरंतरता बनी चुनौती
सिलीगुड़ी: नशे की लत के खिलाफ जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत माटीगाड़ा थाने की ओर से अथारोखाई ग्राम पंचायत क्षेत्र में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज में बढ़ती नशाखोरी के प्रति नागरिकों को जागरूक करने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम को पुलिस की सामुदायिक सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।
नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति, परिवार और पूरे समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ऐसे कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है। विशेष रूप से स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ जागरूकता अभियान चलाने से नशे की समस्या के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने और इसके शुरुआती चरण में ही पहचान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सिलीगुड़ी पुलिस की यह पहल सकारात्मक है, लेकिन नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। नशे की लत के कारणों, इसके सामाजिक प्रभावों तथा इससे प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए आवश्यक सहायता को भी अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। पुलिस की सक्रियता के साथ स्थानीय निकायों, शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच प्रभावी समन्वय भी आवश्यक है।
इसी तरह, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर नियंत्रण, जोखिमग्रस्त युवाओं की पहचान, परामर्श सेवाओं, उपचार तथा पुनर्वास कार्यक्रमों को समान प्राथमिकता देने पर ही जागरूकता अभियान के दीर्घकालिक परिणाम सामने आ सकते हैं। नशे की लत से प्रभावित लोगों को केवल अपराध की दृष्टि से देखने के बजाय उन्हें उपचार, परामर्श और सामाजिक पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
माटीगाड़ा पुलिस द्वारा अथारोखाई क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने समुदाय स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाने का सकारात्मक संदेश दिया है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता केवल कार्यक्रम के आयोजन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका आकलन नागरिकों के व्यवहार में आने वाले बदलाव और नशे की समस्या पर नियंत्रण के ठोस परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अतः सिलीगुड़ी पुलिस की इस तरह की सक्रियता को नियमित जनजागरूकता, प्रभावी नियंत्रण, उपचार और पुनर्वास से जोड़कर ही नशामुक्त समाज के निर्माण के लक्ष्य को सार्थक दिशा दी जा सकती है।





