काठमांडू: रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार द्वारा खोज, बचाव और राहत कार्य में पूरी ताकत झोंक दी गई है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के अनुसार, अब तक ११,३७९ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि ३,९२५ लोग अब भी लापता हैं।
बाढ़ के कारण अब तक ९३९ शव बरामद किए जा चुके हैं। जिनकी पहचान नहीं हो सकी है, उनका ‘लावारिस और अज्ञात शव प्रबंधन दिशानिर्देश’ के तहत डीएनए सैंपल सुरक्षित रखकर वैज्ञानिक प्रक्रिया से अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
राहत और सड़क नेटवर्क
प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप कोष और राहत कोष में ९ वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ५ अरब ८७ करोड़ ९२ लाख रुपये जमा हो चुके हैं। इसके अलावा हिमालयन और लक्ष्मी बैंक के खातों में ३१.९३ लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता प्राप्त हुई है।
गल्छी-त्रिशूली राजमार्ग के अंतर्गत वैकल्पिक मार्ग शुरू होने से नुवाकोट का त्रिशूली पार क्षेत्र एक बार फिर जिला मुख्यालय से सीधे सड़क संपर्क में आ गया है। रसुवा और नुवाकोट के २७ वितरण केंद्रों के जरिए ३,६९६ प्रभावित नागरिकों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है।
आवागमन को सुचारू बनाने के लिए देवीघाट, त्रिशूली और बेत्रावती में बेली ब्रिज लगाने का सर्वे पूरा हो चुका है। भारत सरकार से २३० फीट का मॉडुलर स्टील ब्रिज प्राप्त हो चुका है और ७ अतिरिक्त बेली ब्रिज मिलने वाले हैं, जबकि चीन की ओर से ३० बेली ब्रिज शीघ्र प्राप्त हो रहे हैं।
जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में तलाश जारी
बाढ़ से प्रभावित अपर त्रिशूली-१, रसुवागढ़ी, चिलिमे और अपर त्रिशूली-३ए जैसी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में नेपाली सेना, पुलिस और विदेशी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम खोज और बचाव अभियान चला रही है। सेना ने विभिन्न प्रोजेक्ट स्थलों से सैकड़ों श्रमिकों को रेस्क्यू किया है।
प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं तेजी से बहाल हो रही हैं। धाडिंग में ९८ प्रतिशत और नुवाकोट में ८५ प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, जबकि नेपाल टेलीकॉम के १२० में से ११० और एनसेल के ७८ में से ७५ टावरों ने काम करना शुरू कर दिया है।
‘जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत’~
हिमालयी क्षेत्र में हिमस्खलन के कारण आई इस आपदा को इस क्षेत्र की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों के खिलाफ अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से आवाज उठाने का समय आ गया है।
सरकार अब प्रभावितों के भौतिक तथा मानसिक पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में जुटी हुई है।





