राहुल गांधी का सवाल: ‘छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया?’
नई दिल्ली: नीट आंदोलन और छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर संसद में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सामने २४ घंटे की मैराथन चर्चा की पेशकश की है। विपक्षी दलों द्वारा लगातार गृह मंत्री के बयान और जवाब की मांग को लेकर किए जा रहे हंगामे के बीच शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से भाग नहीं रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र सौंपकर आज दोपहर ३ बजे से कल दोपहर ३ बजे तक बिना किसी रुकावट के लगातार चर्चा करने के लिए तैयार हों।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने विपक्षी नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘लापता’ या ‘भगोड़ा’ जैसे शब्दों पर कड़ा ऐतराज जताया। शाह ने कहा कि जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, वे लगातार अपने कक्ष में मौजूद हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही कह चुके हैं कि सरकार छात्रों से जुड़े हर पहलू पर बात करने को तैयार है। गृह मंत्री ने कहा कि यदि स्पीकर अनुमति दें तो वे प्रश्नकाल तक सस्पेंड करके २४ घंटे सदन में बैठने और विपक्ष के हर सवाल का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार हैं, ताकि देश के सामने सब स्पष्ट हो सके।
अमित शाह के इस बयान के तुरंत बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पलटवार किया। राहुल गांधी ने गृह मंत्री से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि शाह पहले यह स्पष्ट करें कि प्रदर्शनकारी “छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया था?” विपक्ष का कहना है कि सरकार सिर्फ औपचारिक चर्चा का आश्वासन देने के बजाय छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन और उनकी मांगों पर सीधा और ठोस जवाब दे। गृह मंत्री के इस प्रस्ताव के बाद अब गेंद विपक्ष के पाले में है कि वह संसद में नियमत: चर्चा में शामिल होता है या हंगामा जारी रखता है।









