नेपाल आने वाले पर्यटकों में भारतीयों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

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काठमांडू: ​भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना ‘रोटी-बेटी’ का संबंध रहा है, जो दोनों देशों की खुली सीमाओं और आपसी भरोसे को दर्शाता है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच इस प्रगाढ़ दोस्ती में पर्यटन एक बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत पहलू बनकर उभरा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा जारी ताजा और विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून महीने में नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून के महीने में कुल ९१,३६३ विदेशी पर्यटक हिमालय की गोद में बसे नेपाल पहुंचे हैं, जो पिछले साल जून के ७६,४२५ पर्यटकों की तुलना में १९.५ फीसदी अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने कोरोना महामारी से पहले यानी जून २०१९ के ७४,८८३ पर्यटकों के रिकॉर्ड को भी २२ फीसदी की बढ़त के साथ पार कर लिया है।
​नेपाल के पर्यटन उद्योग के लिए भारत लगातार सबसे बड़ा और मुख्य स्रोत बना हुआ है। काठमांडू में स्थानीय बालेन सरकार द्वारा भारतीय गाड़ियों के परमिट और अन्य दस्तावेजी नियमों में सख्ती किए जाने के बावजूद भारतीय पर्यटकों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। जून महीने में भारत से रिकॉर्ड ४१,८०९ पर्यटक नेपाल की वादियों का लुत्फ उठाने पहुंचे, जो नेपाल आने वाले कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग ४५.७६ प्रतिशत है। इस सूची में भारत के बाद दूसरे पायदान पर अमेरिका रहा, जहां से ११,८३६ पर्यटक नेपाल आए। वहीं, खुद को नेपाल का बड़ा मददगार बताने वाला और पर्यटकों को एक कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने वाला पड़ोसी देश चीन इस बार तीसरे नंबर पर पिछड़ गया, जहां से केवल ९,९९५ पर्यटक ही नेपाल आए। इसके बाद चौथे स्थान पर बांग्लादेश (४,३२२ पर्यटक) और पांचवें स्थान पर ऑस्ट्रेलिया (२,८९६ पर्यटक) का नंबर आता है।
​भौगोलिक और क्षेत्रीय आधार पर बात करें तो नेपाल पहुंचने वाले पर्यटकों में सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिण एशियाई देशों का है, जो कुल संख्या का लगभग ५२.८२ फीसदी है। इसके बाद बाकी के एशियाई देशों से १७.६८ प्रतिशत और अमेरिकी महाद्वीप से १४.३६ प्रतिशत पर्यटक नेपाल पहुंचे। नेपाल पर्यटन बोर्ड का कहना है कि इन शानदार आंकड़ों से यह साफ होता है कि वैश्विक स्तर पर नेपाल को लेकर विदेशी सैलानियों का भरोसा और आकर्षण काफी बढ़ा है। हालांकि, पर्यटन क्षेत्र में आई इस भारी तेजी के बीच कुछ चिंताजनक बातें भी सामने आई हैं। सड़क मार्ग से अपनी निजी गाड़ियों के जरिए नेपाल जाने वाले कई भारतीय यात्रियों ने शिकायत की है कि उन्हें परमिट के नाम पर सीमा और रास्तों में अवैध वसूली तथा प्रशासनिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यदि नेपाल को अपने इस पर्यटन उछाल को बनाए रखना है, तो उसे भारतीय पर्यटकों के इन खराब अनुभवों और व्यवस्थागत कमियों को जल्द से जल्द दूर करना होगा।

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