दार्जिलिंग: दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स क्षेत्र के चाय और सिनकोना बागान श्रमिकों के कल्याण और विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए लोकसभा सांसद राजू बिष्ट ने पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री अर्जुन सिंह और श्रम विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ कोलकाता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। सांसद बिष्ट ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए इस बैठक की विस्तृत जानकारी साझा की है।
सांसद बिष्ट के अनुसार, उत्तर बंगाल में सबसे अधिक रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र चाय उद्योग होने के बावजूद, पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की गलत नीतियों के कारण इस क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बिष्ट ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “श्रम सुधारों के अभाव और भारत की संसद द्वारा पारित नए श्रम संहिताओं को लागू करने से इनकार करने के कारण चाय और सिनकोना बागानों के श्रमिक अपने न्यायोचित अधिकारों और लाभों से वंचित रह गए थे। इसलिए मैंने माननीय श्रम मंत्री से राज्य में नए श्रम संहिताओं को जल्द से जल्द लागू करने का अनुरोध किया है।”
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की वर्तमान नई सरकार श्रमिकों के हितों की रक्षा, औद्योगिक विकास, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार और पारदर्शी नियम सुनिश्चित करने के लिए नए श्रम संहिताओं को जल्द लागू करने को प्राथमिकता दे रही है।
बैठक में सांसद बिष्ट ने सभी चाय और सिनकोना बागान श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएससीआई) के दायरे में शामिल करने की मांग की, ताकि इन श्रमिकों को आवश्यक सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य लाभ मिल सकें। इसके साथ ही, उन्होंने बंद पड़े पेशोक और अन्य चाय बागानों के श्रमिकों के ‘फ्यालोई’ (बंद हो चुकी औद्योगिक फैक्ट्रियों के कर्मचारियों को वित्तीय सहायता) बकाए का भुगतान न होने का मुद्दा उठाते हुए इसके शीघ्र समाधान का आग्रह किया।
बिष्ट ने लॉन्गव्यू चाय बागान के श्रमिकों की गंभीर समस्या को भी मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया, जहां पीएफ (भविष्य निधि), ग्रेच्युटी, मजदूरी और अन्य लाभों के रूप में १२ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया लंबित है। उन्होंने श्रमिकों के कानूनी अधिकारों और वैधानिक लाभों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मंत्री सिंह से ठोस हस्तक्षेप की मांग की। श्रम मंत्री अर्जुन सिंह ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और चाय व सिनकोना बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।









