बोले: “किरदार लंबा नहीं, यादगार होना चाहिए”
नई दिल्ली: अभिनेता दानिश पंडोर पिछले ६ महीने के भीतर ही बड़े पर्दे पर दो बार एक हिंसक पाकिस्तानी किरदार के रोल में नजर आ चुके हैं और अपने बेहतरीन अभिनय से उन्होंने एक बार फिर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर २’ में गैंगस्टर उजैर बलोच का खूंखार किरदार निभाने के बाद, इन दिनों बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की पसंदीदा बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में वे एक दंगाई ‘अफजल’ के रोल में दिखाई दे रहे हैं। मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली की इस फिल्म में दानिश ने भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त दंगाइयों की एक टोली के नेता का हिंसक किरदार निभाया है।
हालांकि, इम्तियाज अली की इस फिल्म में हिंसा का स्तर ‘धुरंधर’ जैसा तो बिल्कुल नहीं है, मगर इस कहानी के एक छोटे से रोल में दानिश के हुनर का एक अलग ही सलीका नजर आया है। महज ६ महीने के भीतर दो दमदार नकारात्मक किरदारों से चर्चा बटोरने वाले दानिश ने अपने स्क्रीन टाइम और स्क्रिप्ट की चॉइस पर खुलकर बात की है। अपने रोल चुनने के प्रोसेस को साझा करते हुए दानिश पंडोर ने साफ कहा कि उनके लिए पर्दे पर किरदार की लंबाई मायने नहीं रखती, बल्कि वह किरदार कितना प्रभावी है और दर्शकों को कितने समय तक याद रहता है, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।











