नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद भारत रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट पर एक बार फिर सक्रिय होने की योजना बना रहा है। साल २०२५ से अमेरिका द्वारा फिर से प्रतिबंध लगाने और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते इस प्रोजेक्ट पर अनिश्चितता बनी हुई थी, जिससे यहां भारत की गतिविधियां सीमित हो गई थीं। अब इरान में युद्ध रुकने के बाद इलाके में भू-राजनीतिक हालात स्थिर हो रहे हैं, जिसके कारण भारत और ईरान जल्द ही इस बंदरगाह पर सामान्य कामकाज और इसके विस्तार के लिए बातचीत फिर से शुरू कर सकते हैं।इस आगामी बातचीत में मुख्य रूप से ‘शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल’ के विस्तार पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस टर्मिनल को मई २०२४ में हुए १० साल के समझौते के तहत ‘इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ (आईपीजीएल) संचालित कर रही है। नई चर्चाओं के दौरान पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता को वर्तमान के १००,००० टीईयू से बढ़ाकर ५००,००० टीईयू करने, कंटेनर हैंडलिंग क्षमता को मजबूत करने, नए कार्गो बर्थ बनाने और इसे ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (आईएनएसटीसी) जैसे क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ने के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।भारत इस बंदरगाह के लिए जरूरी उपकरण खरीदने में १२० मिलियन डॉलर निवेश करने का अपना वादा पहले ही पूरा कर चुका है। इसके अतिरिक्त, भारत ने बंदरगाह की क्षमता बढ़ाने और इसे अफगानिस्तान तथा मध्य एशियाई देशों से जोड़ने वाली रेलवे लाइन के विकास में मदद के लिए अगले कुछ सालों में ४००-५०० मिलियन डॉलर निवेश करने का प्रस्ताव दिया है। इस योजना में इस सुविधा को ७०० किलोमीटर लंबे चाबहार-जहेदान रेलवे प्रोजेक्ट के जरिए ईरान के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना भी शामिल है।लंबे समय से चाबहार बंदरगाह को भारत की यूरेशियन कनेक्टिविटी रणनीति के एक अहम हिस्से के तौर पर देखा जाता रहा है। इसका मुख्य मकसद पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के साथ व्यापार को सीधे तौर पर बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, यह क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का मुकाबला करने के लिए भारत के लिए अत्यंत आवश्यक है, जिससे चाबहार में भारत की फिर से शुरू होने वाली यह सक्रियता निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए एक बड़ी टेंशन का सबब बनेगी।










