वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस संपन्न
कोलकाता: सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स, सीएमआरआई ने आज वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे के मौके पर एक खास प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। न्यूरोसर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमिताभ चंदा की अगुवाई में हुए इस कार्यक्रम में अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन करवा चुके डॉक्टरों और मरीजों को एक साथ एक ही मंच पर लाया गया। इस इवेंट में इस बात पर गहरा मंथन हुआ कि पिछले तीन दशकों में न्यूरोसर्जिकल प्रैक्टिस का ढर्रा किस कदर बदला है और आज ब्रेन ट्यूमर का डायग्नोसिस करवाने वाले मरीजों के लिए इन आधुनिक बदलावों का क्या मतलब है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ब्रेन ट्यूमर के इलाज की नई दिशा और आधुनिक तौर-तरीकों पर भी विस्तार से बात की गई। अब प्रिसिजन मेडिसिन, जिसमें ट्यूमर की जेनेटिक और मॉलिक्यूलर खासियत को देखकर इलाज तय किया जाता है, बड़े स्पेशलिस्ट सेंटर्स से निकलकर अब आम क्लिनिकल प्रैक्टिस में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने लगी है।
इस मौके पर सीएमआरआई के न्यूरोसर्जरी डायरेक्टर डॉ. अमिताभ चंदा ने कहा, “पिछले दस सालों के भीतर ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में गजब का बदलाव आया है, और यह बदलाव सबसे ज्यादा मरीजों की रिकवरी और नतीजों में साफ दिखता है। आज की एडवांस इमेजिंग टेक्नोलॉजी हमें ऑपरेटिंग रूम में जाने से पहले ही बोली, मूवमेंट, याददाश्त और विजन जैसी दिमाग की जरूरी कड़ियों को पहले ही मैप करने की सहूलियत देती है। न्यूरोनेविगेशन सिस्टम रियल टाइम में सर्जिकल अप्रोच को गाइड करते हुए डॉक्टरों को रास्ता दिखाते हैं। अगर दिमाग का कोई जरूरी हिस्सा या नस खतरे में हो, तो इंट्राऑपरेटिव मॉनिटरिंग टीम को तुरंत अलर्ट कर देती है। फ्लोरेसेंस-गाइडेड सर्जरी की मदद से ट्यूमर वाले टिशू को स्वस्थ टिशू से इतनी सफाई से अलग पहचाना जा सकता है जो पहले कभी मुमकिन नहीं था। वहीं ‘अवेक क्रेनियोटॉमी’, जिसमें मरीज प्रोसीजर के खास स्टेज के दौरान पूरे होश में रहता है, हमें दिमाग की वर्किंग कंडीशन को मॉनिटर करते हुए ट्यूमर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा सुरक्षित तरीके से हटाने में मदद करती है। इनमें से हर एक तकनीक ने उन जटिल ऑपरेशनों के रिस्क प्रोफाइल को एकदम कम कर दिया है, जिन्हें पहले काफी हिचकिचाहट के साथ किया जाता था या जिनकी कोशिश ही नहीं की जाती थी।”
मैनेजमेंट का नजरिया रखते हुए सीएमआरआई के यूनिट हेड डॉ. सोमब्रत रॉय ने कहा, “वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर हमारा फोकस सिर्फ क्लिनिकल एक्सीलेंस यानी बढ़िया इलाज देने पर ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच अवेयरनेस और एंपैथी (सहानुभूति) जगाने पर भी है। सही समय पर डॉक्टर से कंसल्टेशन और टाइम पर डायग्नोसिस सचमुच इलाज और रिकवरी की पूरी तस्वीर बदल सकता है। हमारा अस्पताल पेशेंट एक्सपीरियंस शेयरिंग सेशन पर बहुत जोर देता है, जहां मरीज और उनके परिवार वाले डायग्नोसिस, इलाज और रिकवरी के अपने पूरे सफर को खुलकर साझा करते हैं। इससे समय पर सही कदम उठाने और मल्टीडिसिप्लिनरी केयर की अहमियत पर जोर मिलता है।”









