घरेलू गैस और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा

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​नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। शनिवार रात को घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दाम में २९ रुपये की एक और बढ़ोतरी कर दी गई। पिछले ३ महीने के भीतर घरेलू गैस की कीमतों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है, क्योंकि इससे पहले ७ मार्च को भी प्रति सिलेंडर ६० रुपये बढ़ाए गए थे। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में १४.२ किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर ९४२ रुपये हो गई है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले ४ महीनों में ही घरेलू सिलेंडर के दामों में कुल ८९ रुपये का इजाफा कर दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले ५.५६ करोड़ परिवारों ने महंगाई के कारण दोबारा सिलेंडर ही नहीं भरवाया, जिनमें से ३.३० करोड़ परिवारों ने तो एक बार भी रीफिल नहीं कराया।
​कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे के आंकड़े साझा करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष २०२५-२६ में इन तीन सरकारी तेल कंपनियों ने कुल मिलाकर ७७,२८०.६५ करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुनाफा कमाया है, जो वित्त वर्ष २०२४-२५ के मुकाबले १३०% ज्यादा है। यहां तक कि वर्ष २०२६ की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में, जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तब भी इन कंपनियों का मुनाफा १९,४७० करोड़ रुपये रहा—जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले ४०% अधिक था।
​गैस के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडरों और पेट्रोल-डीजल के दामों में भी आग लगी हुई है। १ जून को हुई बढ़ोतरी के बाद १९ किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ४२ रुपये बढ़कर अब ३,११३ रुपये हो चुकी है। इससे पहले कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में मई में १,००० रुपये, अप्रैल में १९५.५ रुपये और मार्च में ११४.५ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा समय में देश भर के ३३.३७ करोड़ परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन है, जिनमें उज्ज्वला योजना के १०.५८ करोड़ परिवार भी शामिल हैं। इसके अलावा, मई के महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ४ बार बढ़ोतरी की गई, जिससे महज १० दिनों (१५ मई से २५ मई) के भीतर तेल की कीमतें करीब ७ रुपये से ७.५ रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गईं। सरकार का कहना है कि २८ फरवरी से शुरू हुए मध्य-पूर्व तनाव और ईरान द्वारा ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को बंद किए जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसका असर भारत को झेलना पड़ रहा है।

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