​”चाय बागान बंद करके होटलों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी, केंद्र से मिले ३१३ करोड़ रुपये जल्द ही श्रमिकों के कल्याण के लिए खर्च किए जाएंगे: सांसद राजू बिष्ट

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सिलीगूडी: उत्तर बंगाल के चाय उद्योग के भविष्य, बंद पड़े चाय बागानों को फिर से शुरू करने और चाय श्रमिकों के कल्याण को लेकर मंगलवार को उत्तरकन्या (सचिवालय) में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर बंगाल में अब किसी भी चाय बागान को बंद रहने नहीं दिया जाएगा और सभी बंद बागानों को जल्द से जल्द खुलवाने के प्रयास किए जाएंगे।
​इस उच्च स्तरीय बैठक में उत्तर बंगाल विकास मंत्री निसिथ प्रामाणिक, सांसद राजू बिष्ट, सांसद मनोज तिग्गा, विधायक विशाल लामा और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ चाय बोर्ड के अधिकारी व प्रशासनिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में चाय उद्योग की मौजूदा स्थिति, श्रमिकों की चुनौतियां और उनके जीवन स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा में सुधार लाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
​बैठक के बाद सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री चाय श्रमिक कल्याण योजना’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा १,००० करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि जहां असम सरकार ने इस आवंटन से लगभग ७०० करोड़ रुपये का उपयोग कर लिया, वहीं उत्तर बंगाल में तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा केंद्र को आवश्यक प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण लगभग ३१३ करोड़ रुपये का फंड बिना उपयोग के रह गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस शेष राशि का उपयोग जल्द ही चाय श्रमिकों के स्वास्थ्य, कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा।
​सांसद बिष्ट ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में चाय बागानों को बंद कर उनकी भूमि को होटल परियोजनाओं (होटल और रिसॉर्ट्स) में बदलने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि चाय बागान की जमीन पर केवल चाय की खेती ही होनी चाहिए और ऐसे किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाय उद्योग को मजबूत करने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी दिनों में और व्यापक योजनाएं बनाई जाएंगी।

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