पहलगाम आतंकी हमले की जांच का दायरा बढ़ा, एनआईए अब हमास के कोण से भी कर रही पड़ताल

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​नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने अनुसंधान का दायरा और व्यापक कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब गाजा स्थित सशस्त्र संगठन हमास की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि एनआईए ने अपनी चार्जशीट में हमास से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस हमले में किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिला था।
​सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि हमलावर आतंकियों के संबंध पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से हो सकते हैं। इसी कड़ी में हमास का नाम भी जांच के दायरे में आया है।
​गौरतलब है कि पिछले वर्ष २२ अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी क्षेत्र में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले में एक स्थानीय निवासी सहित २६ लोगों की मौत हुई थी। हमले के तरीके को देखकर शुरुआती दौर में ही सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि इसकी कार्यप्रणाली कुछ हद तक हमास के हमलों से मिलती-जुलती है। उस समय इजरायल की ओर से भी इस तरह की आशंका व्यक्त की गई थी।
​जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियां सामने आईं। इसी आधार पर अब हमास के संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अब तक किसी भी संगठन की प्रत्यक्ष संलिप्तता को लेकर आधिकारिक रूप से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
​इस बीच जांच में एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान बरामद दो मोबाइल फोन में से एक की खरीद पाकिस्तान के कराची स्थित एक बैंक से लिए गए ऋण के जरिए की गई थी। जांच में सामने आया है कि अतीत में भी इस बैंक का नाम आतंकी वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) के मामलों में सामने आ चुका है।
​रिपोर्टों के मुताबिक, इस बैंक पर पहले भी लश्कर-ए-तैयबा को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और उसके खातों से जुड़े होने के आरोप लग चुके हैं। इसके अलावा, अल-कायदा से जुड़े कुछ संगठनों के साथ भी इसके संभावित संबंधों का उल्लेख पूर्व जांचों में किया गया था।
​पहलगाम हमले की जांच अब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क, वित्तीय सहायता और सीमा पार संचालित संगठनों के संभावित संबंधों पर केंद्रित हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं ताकि हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

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