पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत से बौखलाए कट्टरपंथी
नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बार फिर भारत विरोधी प्रदर्शन देखने को मिला है। जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों और दक्षिणपंथी रुझान वाले दलों के नेतृत्व में सैकड़ों की तादाद में लोग ढाका की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों के साथ ज्यादती की जा रही है। बांग्लादेश के चर्चित पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी के अनुसार, यह जुलूस हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी)
की जीत के बाद मुसलमानों पर कथित अत्याचार के विरोध में निकाला गया था। चौधरी ने बताया कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और अन्य इस्लामी संगठन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) के मुखर समर्थक रहे हैं और वहां हुए राजनीतिक बदलाव से वे खफा हैं।
बांग्लादेश में मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी सहित कई गुट लगातार भारत विरोधी राजनीति को हवा देते रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान यह विरोध काफी ज्यादा बढ़ गया था और ऐसे तत्वों को लगातार संरक्षण मिलता हुआ दिखाई दिया था। हालांकि, तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश की, जिससे ढाका की सड़कों पर इस तरह के प्रदर्शनों में काफी कमी आई थी। लेकिन शुक्रवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह क्रम टूट गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तारिक रहमान की सरकार इन तत्वों से किस तरह निपटती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की टीएमसी को हराकर सत्ता हासिल की है, जिसके बाद से बांग्लादेश से लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बांग्लादेशी नेता नाहिद इस्लाम सहित कई दलों की ओर से बयान जारी किए गए हैं, जिनमें यह चिंता जताई गई है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता के इस बड़े बदलाव का सीधा असर बांग्लादेश पर भी पड़ सकता है।









