श्रम संस्कृति पार्टी–सुदन किराती समूह के बीच एकता, वैकल्पिक राजनीति में नई बहस

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भद्रपुर(देवेन्द्र के ढुंगाना): हर्क साम्पाङ के नेतृत्व वाली श्रम संस्कृति पार्टी और सुदन किराती निकट समूह के बीच राजनीतिक एकता पर सहमति हुई है। द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों पक्ष एकता के लिए सहमत हुए हैं।
किराती निकट स्रोतों के अनुसार, एकता के बाद सुदन किराती को पार्टी में वरिष्ठ नेता की भूमिका देने पर समझदारी बनी है। साथ ही, उनके निकट कुछ नेताओं के उचित व्यवस्थापन को लेकर भी सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने आज ही राजधानी काठमांडू में संयुक्त कार्यक्रम के माध्यम से औपचारिक रूप से एकता की घोषणा कर दी है।
पूर्व माओवादी नेता सुदन किराती पिछले चुनाव से पहले प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी से आबद्ध थे। लेकिन हाल के दिनों में उन्होंने उस पार्टी को छोड़कर नए राजनीतिक सहयोग की खोज शुरू की थी।
वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में श्रम संस्कृति पार्टी:
धरान के पूर्व मेयर हर्क साम्पाङ द्वारा श्रम, पारदर्शिता और जनसहभागिता को केंद्र में रखकर चलाए गए अभियान से उभरी श्रम संस्कृति पार्टी हाल के समय में नेपाली राजनीति में एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में चर्चा में आई है। पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति बढ़ते असंतोष के बीच श्रम, आत्मनिर्भरता और प्रत्यक्ष जनसहभागिता के एजेंडे ने विशेष रूप से युवाओं के बीच आकर्षण बढ़ाया है।
विश्लेषकों के अनुसार, सुदन किराती जैसे स्थापित राजनीतिक व्यक्तित्व के आगमन से पार्टी को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। हालांकि, संगठन विस्तार, स्पष्ट वैचारिक दिशा और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाना पार्टी के सामने प्रमुख चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
श्रम संस्कृति पार्टी और किराती समूह के बीच हुई इस एकता को आगामी राजनीतिक समीकरणों और वैकल्पिक शक्ति निर्माण के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

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