‎बड़े बजट की फिल्मों में महिलाओं की भूमिका कम, कोंकणा सेन शर्मा का तीखा बयान

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‎‎मुंबई: हिंदी फिल्म जगत की तथाकथित ‘मसाला’ फिल्मों की भीड़ में कोंकणा सेन शर्मा हमेशा अलग पहचान रखती हैं। पिछले २५ वर्षों से अपने अभिनय कौशल से दर्शकों को प्रभावित करती आ रही इस अभिनेत्री का हाल ही में अनुराग बसु निर्देशित फिल्म ‘मेट्रो… इन दिनों’ में प्रदर्शन फिर चर्चा में है।‎हालांकि लंबे समय तक फिल्म जगत में रहने के बाद अब उन्होंने उद्योग की कार्यप्रणाली पर खुलकर बात की है। उनका स्पष्ट कहना है कि अच्छे किरदार पाने की जंग आज भी उतनी ही कठिन है, खासकर बड़े बजट की फिल्मों में।‎एक हालिया बातचीत में उन्होंने बताया कि छोटे बजट की फिल्मों या डिजिटल माध्यमों में अब महिलाओं के लिए मजबूत और जटिल किरदार लिखे जा रहे हैं, जहां कहानी प्रमुख होती है। लेकिन बड़े बजट की फिल्मों में स्थिति अलग है। उनके अनुसार, “यदि आप धन के पहलू को देखें तो असली तस्वीर सामने आती है। बड़े बजट की फिल्मों में आज भी पुरुष नायकों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।”‎डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने अभिनेत्रियों के लिए नए अवसर खोले हैं। कोंकणा ने कहा कि अब महिला पुलिस अधिकारी या खलनायिका जैसे किरदारों में भी अभिनेत्रियां दिखाई दे रही हैं। हालांकि उनके अनुसार, इस तरह के जटिल किरदारों में अपेक्षाकृत अधिक आयु की अभिनेत्रियों को ही अधिक अवसर मिलते हैं।‎उनका मानना है कि पारंपरिक धारा से हटकर अच्छी कृतियां हर वर्ष बनती हैं, लेकिन उनकी संख्या अभी भी सीमित है।‎जल्द ही कोंकणा सेन शर्मा को ‘वेलकम टू खोया महल’ नामक धारावाहिक में देखा जाएगा। इस परियोजना में वह केवल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि सह-निर्माता भी हैं। जयदीप सरकार के साथ मिलकर वह एक राजसी रहस्य पर आधारित कथा प्रस्तुत कर रही हैं, जिसमें विरासत और पारिवारिक होटल के छिपे हुए रहस्यों के बीच भाई-बहन के संबंधों का संघर्ष दिखाया जाएगा।‎इस धारावाहिक में अदिति राव हैदरी और वरुण सोबती की उपस्थिति से दर्शकों में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है।‎बड़े परदे पर लैंगिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए भी कोंकणा सेन शर्मा अपने काम से बार-बार यह साबित कर रही हैं कि अच्छी कृति के लिए बड़े बजट से अधिक बड़ी सोच की आवश्यकता होती है।

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