सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक सामान्य परिवार से निकलकर मात्र २४ वर्ष की आयु में ही अंतरराष्ट्रीय उद्यम जगत में अपनी सशक्त पहचान बना चुकी हैं हर्षिता अरोड़ा। वर्तमान में वह विश्व की अग्रणी उद्यम सहयोगी संस्था वाई कॉम्बिनेटर की सबसे कम आयु की सामान्य भागीदार के रूप में जानी जाती हैं।परंपरागत शिक्षा प्रणाली से हटकर उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपना मार्ग स्वयं चुना। विद्यालय की सीमाओं से बाहर निकलकर उन्होंने स्वयं ही संगणक प्रोग्रामन सीखना प्रारंभ किया और मात्र १३ वर्ष की आयु में उद्यमी बनने का स्वप्न देख लिया। उनका साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय उन्हें तेजी से सफलता की ओर ले गया।उनके द्वारा निर्मित चल दूरभाष अनुप्रयोग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक लोकप्रियता मिली। बाद में एटियोबी नामक उद्यम से जुड़कर उन्होंने अरबों की मूल्यांकन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।हर्षिता अरोड़ा की यह सफलता केवल प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है। उनका जीवन यह स्पष्ट करता है कि केवल शैक्षिक प्रमाणपत्र ही सफलता की गारंटी नहीं होते, बल्कि सही लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और स्वयं पर अटूट विश्वास ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।











