हस्तशिल्प, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण
गंगटोक: आज सिक्किम के एक अनोखे डिज़ाइन संस्थान ‘लैगस्टाल’ का दौरा दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजु विष्ट ने किया। भूटिया भाषा के दो शब्दों—‘लैग’ (हाथ) और ‘स्टाल’ (कौशल)—के मेल से बना यह नाम अपने अर्थ को पूरी तरह दर्शाता है और यहाँ की हर रचना में उत्कृष्ट हस्तकला की झलक दिखाई देती है।
चिमे ओंगमु भूटिया द्वारा स्थापित ‘लैगस्टाल’ आज परंपरा और सृजनात्मकता का संगम बन चुका है। यहाँ प्रत्येक उत्पाद पारंपरिक तकनीकों से तैयार किया जाता है, जिसमें प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल बाँस का उपयोग होता है तथा पूरी प्रक्रिया शून्य अपशिष्ट पद्धति पर आधारित है। यह पहल न केवल प्रकृति के संरक्षण में सहायक है, बल्कि पहाड़ी सांस्कृतिक विरासत को भी संजोकर रख रही है।
सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि इस पहल की सबसे खास बात स्थानीय महिला कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। पारंपरिक कौशल को आजीविका में बदलकर ‘लैगस्टाल’ एक ओर आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, तो दूसरी ओर सिक्किम की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि उत्तर-पूर्व भारत की वास्तविक शक्ति और सुंदरता इसी प्रकार की पहलों में दिखाई देती है।
इस अवसर पर उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीके प्रति भी आभार व्यक्त किया। ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्व के प्रतिभाशाली उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इससे ऐसे परिवर्तनकारी लोग आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में मदद मिल रही है।









