नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के मध्य जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से शांति वार्ता का दूसरा दौर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने जा रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों के मध्य बने कड़वाहट भरे संबंधों और तल्ख बयानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि वर्तमान संघर्षविराम अधिक समय तक प्रभावी नहीं रह पाएगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से प्रत्यक्ष संवाद की इच्छा प्रकट की है, परंतु ईरानी सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी संभावित आक्रमण का प्रतिकार करने हेतु पूर्णतः तत्पर हैं। ईरान ने दृढ़तापूर्वक कहा है कि शत्रु की धमकियों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी शक्ति के साथ उत्तर देंगे।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर ईरान के ‘खत्म अल-अनबिया’ सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही ने सशस्त्र बलों की शक्ति पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं ने इजरायल और अमेरिका को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है, जिसके कारण वे विवश होकर संघर्षविराम की मांग कर रहे हैं। जनरल अब्दोल्लाही के अनुसार, ईरान की जनता सड़कों पर उतरकर अपनी सेना के प्रति अटूट समर्थन प्रदर्शित कर रही है, जो सर्वोच्च कमांडर के निर्देशों का पालन करते हुए किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का तत्काल और प्रभावी उत्तर देने के लिए तैयार है।
सैन्य कमांडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे दावों को भ्रामक और सत्य से परे बताते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय शक्ति को सैन्य संघर्ष के दौरान शांति वार्ताओं का दुरुपयोग कर जमीनी हकीकत को बदलने की अनुमति नहीं देगा, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और प्रबंधन के संदर्भ में। उन्होंने अंत में दोहराया कि यदि किसी भी समझौते का उल्लंघन किया गया, तो ईरान के सशस्त्र बल सक्षम और अत्यंत प्रभावी तरीके से उसका प्रतिशोध लेंगे।










