नई दिल्ली: इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के साथ मतभेद के कारण उनका करियर समय से पहले समाप्त हो गया।
एक साक्षात्कार में पीटरसन ने बताया कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के शुरुआती दौर में बोर्ड ने खिलाड़ियों के साथ सख्ती बरती और मीडिया के माध्यम से उनके खिलाफ माहौल बनाया गया। उन्होंने कहा, “मैंने बड़ा बलिदान दिया और अपना करियर गंवा दिया। इसी कारण सिस्टम के लोग मेरे खिलाफ हो गए।”
पीटरसन के अनुसार, उन्हें ३३ वर्ष की उम्र में १०४ टेस्ट मैच खेलने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया, जबकि वे १५०–१६० टेस्ट मैच खेलकर १२–१३ हजार रन बना सकते थे। उन्होंने कहा कि उनके फैसलों को गलत तरीके से पेश किया गया, जिसका उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ा।
गौरतलब है कि २००८ में आईपीएल के पहले सत्र के दौरान ईसीबी ने अपने अनुबंधित खिलाड़ियों को इस लीग में खेलने से रोक दिया था। २००९ में सीमित समय के लिए अनुमति मिलने के बाद पीटरसन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से जुड़े, जो उनके और बोर्ड के बीच विवाद का कारण बना।
बाद में उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए भी खेला।
पीटरसन का कहना है कि उनके इस संघर्ष का फायदा आज के खिलाड़ियों को मिला है। उन्होंने जोस बटलर का उल्लेख करते हुए कहा कि बटलर ने भी उन्हें धन्यवाद दिया। उनके अनुसार, “मेरे बलिदान की वजह से आज खिलाड़ी फ्रेंचाइजी क्रिकेट का खुलकर आनंद ले पा रहे हैं।”
खिलाड़ी के रूप में करियर समाप्त होने के बाद पीटरसन ने २०२५ में दिल्ली कैपिटल्स के मेंटर के रूप में भी कार्य किया।










