काठमाडौँ(नेत्रविक्रम बिमली): नेपाल सरकार ने भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए अपने कर्मचाऱी तंत्र पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। अब किसी भी सरकारी निकाय में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कार्यालय प्रमुख को प्रत्यक्ष जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल ने सभी मंत्रालय, आयोग और सरकारी कार्यालयों को पत्र भेजकर ‘नीतिगत और संस्थागत भ्रष्टाचार’ समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।
नई निर्देशों में मुख्य बिंदु:
जवाबदेही: किसी भी आर्थिक अनियमितता की स्थिति में प्रारंभिक जवाबदेही कार्यालय प्रमुख की होगी।
सूक्ष्म निगरानी: सार्वजनिक खरिद, ठेक्कापट्टा और राजस्व प्रशासन जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तेज अनुगमन किया जाएगा।
सेवाओं में प्राथमिकता: अपंगता, वृद्धावस्था या असहाय वर्ग के लोगों को सेवा देने में ढिलाई करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
‘जेन-जी’ आंदोलन का प्रभाव
सरकारी सक्रियता को गत भदौ में हुए ‘जेन-जी’ (जेन-जी) आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है। आंदोलन ने सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त समाज की मांग की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यालय प्रमुख को जिम्मेदार बनाने का प्रावधान कर्मचाऱी तंत्र में जवाबदेही बढ़ाएगा। सरकार ने सभी निकायों को भ्रष्टाचार रोकने के लिए कानूनी और व्यावहारिक सुधार सुझाव भेजने का भी आह्वान किया है।










