मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को सशक्त बनाने पर संसद में जोर, दार्जिलिंग और पूर्वी हिमालय क्षेत्र पर विशेष ध्यान

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नई दिल्ली: राज्यसभा में आज सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने मानव–वन्यजीव सहअस्तित्व के दृष्टिकोण को सशक्त बनाने की आवश्यकता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी भारत के सभ्यतागत मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है और विकसित राष्ट्र की ओर यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद श्रींगला ने राज्यसभा में कहा कि देशभर में विकास की गति तेज होने के साथ हमारी प्रगति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होनी चाहिए। निर्मित अवसंरचना वन्यजीवों के आवागमन में बाधा न बने, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही, सदियों से इस भूमि पर मनुष्यों के साथ सहअस्तित्व में रह रहे वन्यजीवों का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, ऐसा उन्होंने उल्लेख किया।
उनके अनुसार, दार्जिलिंग और पूर्वी हिमालय जैसे क्षेत्रों के लिए यह जिम्मेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण है। ये क्षेत्र विश्व के प्रमुख जैव विविधता केंद्रों में शामिल हैं, जहां अनेक दुर्लभ प्रजातियों के वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं।
अंत में उन्होंने “प्रकृति रक्षति रक्षित:” का संदेश देते हुए कहा कि जब हम प्रकृति की रक्षा करते हैं, तब प्रकृति भी हमारी रक्षा करती है।

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