केंद्र सरकारद्वारा एफसीआई के भंडार से टूटे चावल एथनॉल उद्योग को देने की तैयारी, नीति में बड़े बदलाव का प्रस्ताव

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार अगले वर्ष से खाद्य नीति और एथनॉल उत्पादन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। योजना के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के भंडार में मौजूद लगभग ९० लाख टन टूटे चावल को एथनॉल उद्योग को उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।
खाद्य सचिव संजय चोपड़ा के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में दिए जाने वाले चावल में टूटे चावल की हिस्सेदारी को २५ प्रतिशत से घटाकर १० प्रतिशत करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और भारत ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयास तेज कर रहा है। सरकार एथनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देकर वैकल्पिक ईंधन नीति को मजबूत करना चाहती है।
चोपड़ा ने बताया कि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का स्तर २०१३ के १.५ प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में २० प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिससे २०१४ के बाद देश को १.६३ लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है।
नई नीति के तहत सरकार केवल उत्पादन वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि एथनॉल की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। इसमें २० प्रतिशत से अधिक ब्लेंडिंग, डीजल में एथनॉल मिश्रण और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने जैसे विकल्प शामिल हैं।
सरकार फिलहाल ८० करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराती है, जिसमें टूटे चावल का हिस्सा २५ प्रतिशत है। प्रस्तावित बदलाव के बाद हर वर्ष लगभग ३६० से ३७० लाख टन चावल में से अतिरिक्त हिस्सा एथनॉल उद्योग, पशु आहार और अन्य क्षेत्रों को नीलामी के माध्यम से दिया जाएगा।
इसके अलावा, मक्का को भी एथनॉल उत्पादन के प्रमुख स्रोत के रूप में बढ़ावा देने की योजना है ताकि आपूर्ति स्थिर बनी रहे। सरकार का मानना है कि यह नीति ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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