नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व निकट है। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने पिछले दो दिनों तक कोलकाता में लगातार बैठकें कीं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
हाल ही मे आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि पश्चिम बंगाल में होने वाला आगामी चुनाव पूरी तरह “हिंसामुक्त” और “दबावमुक्त” वातावरण में कराया जाएगा। उन्होंने अपने वक्तव्य में पश्चिम बंगाल की लोकतांत्रिक परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ मतदाताओं की संख्या फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और उरुग्वे की संयुक्त जनसंख्या के बराबर है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग भारत का संविधान का सम्मान करते हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार राज्य में कुल २९४ विधानसभा सीटें हैं, जिनमें २१० सामान्य, ६८ अनुसूचित जाति और १६ अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। २८ फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या ७ करोड़ ८ लाख थी। हालांकि सत्यापन के बाद योग्य मतदाताओं की संख्या ६ करोड़ ४४ लाख ५२ हजार ६०९ निर्धारित की गई है। इनमें १८ से १९ वर्ष आयु वर्ग के नए मतदाताओं सहित कुल ५ लाख २३ हजार नए मतदाता शामिल हैं।
निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इस बार तकनीक और मानव संसाधन का विशेष प्रबंध किया गया है। राज्य में ८० हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे, जिनमें लगभग ६१ हजार ग्रामीण क्षेत्रों में होंगे। प्रत्येक मतदान केंद्र पर इस बार सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष प्रसारण व्यवस्था होगी, जिसकी निगरानी सीधे निर्वाचन आयोग करेगा। महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से १० हजार से अधिक मतदान केंद्र पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित किए जाएंगे।
आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर १२०० से अधिक मतदाता न हों, ताकि भीड़ से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त मतदान केंद्रों के बाहर दूरभाष जमा करने के लिए अलग व्यवस्था भी की जाएगी।
इस बार चुनाव में मानवीय पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ८५ वर्ष से अधिक आयु के लगभग ३ लाख ७८ हजार मतदाताओं तथा दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान करने की वैकल्पिक व्यवस्था रखी गई है। जो मतदाता मतदान केंद्र पर आएंगे, उनके लिए हर केंद्र को भूतल पर रखने, रैंप, पहिया कुर्सी और स्वयंसेवकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने अपनी ४० विभिन्न सेवाओं को एकीकृत करते हुए ‘ईसीआई नेट’ नामक एक समन्वित प्रणाली भी शुरू की है। इसके माध्यम से मतदाता आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जबकि पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत की जानकारी अद्यतन करेंगे। इसके अलावा मतदान के लेखे-जोखे का प्रपत्र मतदान प्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आयोग की ओर से कड़े निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी को किसी राजनीतिक दल के पक्ष में कार्य करते हुए पाया गया तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। राज्य में अवैध नकद धन, मदिरा या मादक पदार्थों के प्रभाव को रोकने के लिए शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदान कितने चरणों में होगा, इसका निर्णय राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से चर्चा की जा चुकी है और अंतिम निर्णय दिल्ली लौटने के बाद लिया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन के अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के सभी मतदाताओं से निर्भय होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की इस पुण्यभूमि में चुनाव वास्तव में एक उत्सव का रूप लेगा।










