कोलकाता: नयी दिल्ली के लुटियन क्षेत्र में स्थित १८१, साउथ एवेन्यू सिर्फ सरकारी आवास नहीं था, बल्कि मुकुल रॉय की दिल्ली राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। एक समय इसे त्रिणमूल कांग्रेस नेताओं का ‘दिल्ली दरबार’ कहा जाता था। जब ममता बनर्जी राजधानी आतीं, तो इसी पते को प्राथमिकता देतीं।
१८१ मुकुल रॉय का ‘घर के बाहर घर’ था- रणनीति, संवाद और राजनीतिक संतुलन का ठिकाना। संसद सत्र के बाद शाम को यहां पत्रकारों और कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक मुलाकातें होतीं। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी विस्तार की योजनाएं यहीं आकार लेतीं। भाजपा के उभरते नेताओं शांतनु ठाकुर और निशीथ प्रमाणिक को राष्ट्रीय राजनीति से परिचित कराने में भी इस पते की भूमिका रही।
पास ही १८३ नंबर बंगला है, जहां अभिषेक बनर्जी का आवास है। कभी १८१ में ममता बनर्जी का ठहरना आम बात थी, जब मुकुल रॉय राज्यसभा सांसद और पार्टी के ‘सेकंड इन कमांड’ माने जाते थे। २०१७ में रिश्तों में आई दरार के बाद १८१ से ममता का सामान हटाकर १८३ में शिफ्ट किया गया—एक प्रतीकात्मक बदलाव।
मुकुल रॉय ने भाजपा में शामिल होने के बाद भी १८१ नहीं छोड़ा। २०१९ लोकसभा चुनाव के बाद बंगाल भाजपा के १८ सांसदों की तस्वीरें यहां टंगी गईं। ममता और अभिषेक की जगह भाजपा का झंडा लहराया, साथ ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तस्वीरें सजीं।
२०२१ में मुकुल रॉय की त्रिणमूल में वापसी के बाद उन्हें १८१ खाली करना पड़ा। हाल में त्रिणमूल संसदीय दल ने बंगले को फिर अपने नियंत्रण में लेकर ममता के ठहरने योग्य तैयार किया है। २०२३ की आखिरी दिल्ली यात्रा में भी मुकुल रॉय १८१ नहीं जा सके। आज भी १८१ साउथ एवेन्यू उस दौर का मौन गवाह है, जब मुकुल रॉय दिल्ली-बंगाल राजनीति के प्रभावशाली सूत्रधार थे।










