कोलकाता: अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभी भाषाओं के सम्मान और संरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने १९५२ में ढाका की सड़कों पर मातृभाषा बांग्ला की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को याद करते हुए कहा, “यह दिन विश्व की सभी भाषाओं और भाषा सेनानियों को नमन करने का दिन है।”
सामाजिक मीडिया पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा, “जिस तरह हम रवीन्द्रनाथ ठाकुर, काजी नजरुल इस्लाम, सुकांत भट्टाचार्य और जीवनानंद दास की बांग्ला भाषा को प्रेम और सम्मान देते हैं, उसी तरह अन्य सभी भाषाएं भी समान रूप से आदर की पात्र हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद राज्य में हिन्दी, संथाली, कुरुख, कुरमाली, नेपाली, उर्दू, राजबंशी, कामतापुरी, पंजाबी और तेलुगु को सरकारी भाषा के रूप में मान्यता दी गई है। इसके अलावा विभिन्न भाषाओं के संरक्षण और प्रसार के लिए हिन्दी अकादमी, राजबंशी भाषा अकादमी, कामतापुरी भाषा अकादमी और संथाली अकादमी जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विभिन्न भाषाई समुदायों के लोगों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा का अवसर मिले। उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे क्षेत्रों में इन पहलों का विशेष महत्व है, जहां विविध भाषाएं प्रचलित हैं।
अपने संदेश के अंत में ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में किसी भी भाषा पर हमला होता है, तो सभी मिलकर उसका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा, “सभी भाषाएं समान रूप से सम्माननीय हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनका यह बयान देश में भाषाई विविधता और बहुलतावाद के समर्थन का संकेत है।










