कोलकाता: राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने राज्य फोकस पेपर २०२६–२७ जारी किया। इसके तहत वित्त वर्ष २०२६–२७ के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत राज्य की वार्षिक ऋण योजना ३.९९ लाख करोड़ रु. का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं २०२५ -२०२६ वित्तीय वर्ष में यह ३.७९ लाख करोड़ रु. था। एग्रीकल्चर सेक्टर पर खास फोकस दिया गया, अब मिलेगा १.३७ लाख करोड़ का सहारा, एमएसएमई को बढ़ावा किया गया, राज्य नें फोकस पेपर २०२६–२७ जारी किया। शुक्रवार को नाबार्ड के बंगाल क्षेत्रीय कार्यालय ने धन्यधान्य में सभागार में राज्य स्तरीय ऋण सम्मेलन २०२६ का आयोजन किया और राज्य फोकस पेपर २०२६-२७ का अनावरण किया।
इसमें कृषि, एमएसएमई और संबद्ध क्षेत्रों में महत्वाकांक्षी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की क्षमता को रेखांकित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ५% की वृद्धि दर्शाता है। यह घोषणा नाबार्ड के सीजीएम (पश्चिम बंगाल) पी.के. भारद्वाज ने राज्य ऋण सम्मेलन के दौरान की।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में नाबार्ड के प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में एग्रीकल्चर के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा इतिहास में पहली बार होगा जब एग्रिकल्चर क्षेत्रों में ऋण लक्ष्य १०० करोड़ रु. का आंकड़ा इस वित्तीय वर्ष में पूरा करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि २०२६ -२७ के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत राज्य की कुल अनुमानित ऋण संभाव्यता ३.९९ लाख करोड़ रु. है इसमें कृषि क्षेत्र जिसमें कृषि अवसंरचना और संबद्ध गतिविधियां शामिल हैं का हिस्सा ३४% है, जो १.३७ लाख करोड़ रु. के बराबर है।
इस सम्मेलन में चीफ गेस्ट वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रभात कुमार मिश्रा ने नाबार्ड, राज्य सरकार और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित कार्य की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि-जलवायु विशेषकर मत्स्य क्षेत्र में उच्च प्रतिफल की संभावना है। साथ ही उन्होंने लाभार्थियों को ऋण से जोड़ने और जोखिम कम करने पर जोर देने की बात की।
कृषि विभाग के प्रधान सचिव ओंकार सिंह मीणा ने कहा कि बंगाल के किसान बहुत ही मेहनती हैं। हमलोगों ने कृषि क्षेत्र में काफी कुछ किया है। उन्होंने तीन सुगंधित चावल को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने का भी यहां उल्लेख किया। उन्होंने बैंकों से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं से और बेहतर सहभागी की उम्मीद की है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे काफी सफलता भी मिली है।










