कोलकाता: भारत की प्रमुख मिड-मार्केट प्राइवेट क्रेडिट आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन (एसेट मैनेजमेंट) कंपनियों में से एक, विवृति एसेट मैनेजमेंट (वीएएम) ने पूर्वी क्षेत्र में अपनी पहुंच का विस्तार किया है और उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल तथा ओड़िशा इसकी नई प्रतिबद्धताओं में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि फैमिली ऑफिस और एचएनआई इक्विटी बाज़ार में उतार-चढ़ाव के मुकाबले कम पर प्रतिफल (यील्ड) सृजन के तरीके की तलाश कर रहे हैं, साथ ही अपने पोर्टफोलियो को विविधिकृत भी कर रहे हैं।
विवृति एएमसी ने २०१९-२० में लॉन्च हुए विंटेज-I के तहत तीन फंड का पूरा कैपिटल गिवबैक २०२४ तक पूरा कर लिया है। इसने २०२१ में लॉन्च हुए विंटेज-२ फंड में निवेशित पूंजी का ७३% से अधिक (पी+I) वितरित किया है।

विवृति का डायवर्सिफाइड बॉन्ड फंड सीरीज़-२, जो केटेगरी-२ डेट एआईएफ है, वह अपने विंटेज-३ के अंग के तौर पर ग्रीन-शू ऑप्शन के इस्तेमाल के बाद २,१०० करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता के साथ जल्द ही अंतिम क्लोज़र पर पहुंचेगी।
विवृति शॉर्ट टर्म डेट फंड एक ओपन-एंडेड कैटेगरी – ३ एआईएफ है, जिसे २०२४ में लॉन्च किया गया था। यह देश के पहले इंटरवल फंड/सेमी-लिक्विड प्राइवेट क्रेडिट फंड में से एक है। यह एचएनआई /यूएचएनआई और कॉर्पोरेट ट्रेज़री के लिए प्राइवेट क्रेडिट के अवसरों तक तुरंत और पूर्ण पहुंच प्रदान करता है, साथ ही व्यवस्थित तरलता भी प्रदान करता है। अब तक, इस फंड ने 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा के निवेशकों की प्रतिबद्धता हासिल की है।
इसके अलावा, विवृति एएमसी के गिफ्ट सिटी फंड, विवृति इंडिया रिटेल एसेट्स फंड (विराफ), जो १० साल का कैटेगरी-३ क्लोज्ड-एंडेड फंड और भारत का पहला प्रतिभूतिकरण (सिक्योरिटाइज़ेशन) फंड है, इसने २०२३ से वैश्विक निवेशकों से १९० मिलियन अमेरिकी डॉलर (१,७२२ करोड़ रुपये) जुटाए हैं और भारतीय सिक्योरिटाइज्ड नोट में २४० मिलियन अमेरिकी डॉलर (२,१७५ करोड़ रुपये) का निवेश किया है।
विंटेज-४ में, विवृति एएमसी २०२६ में विविधीकृत बॉन्ड फंड-सीरीज़ -३ लॉन्च करने की योजना बना रही है ताकि मिड-मार्केट एंटरप्राइजेज की लचीले डेट की ज़रूरत को पूरा किया जा सके और निवेशकों को स्थिर और अनुमान के मुताबिक रिटर्न प्रदान जा सके।
वीएएम ने शुरुआत से ही अपने सभी फंड में लक्ष्य की मुश्किलों को पार करते हुए लगभग ३,२०० करोड़ रुपये वितरित किये हैं, जो विवृति की ओरिजिनेशन और डील को व्यवस्थित करने की क्षमता, अनुशासित निवेश दृष्टिकोण और मज़बूत जोखिम प्रबंधन ढांचे को रेखांकित करता है।
विवृति एसेट मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी, सौमेंद्र घोष ने कहा: “निजी क्रेडिट भारत के वित्तीय परितंत्र का उल्लेखनीय हिस्सा बनता जा रहा है, जो बचत और अधिशेष (सरप्लस) को अर्थव्यवस्था में वापस लाने में मदद करता है। पूंजी की मांग प्रवर्तकों (प्रमोटर) और प्रबंधन टीमों की वजह से बढ़ रही है, जो वृद्धि, कंसोलिडेशन या मुश्किल कारोबारी हालात के वित्तपोषण के लिए लचीले और विशिष्ट पूंजी समाधान ढूंढ रहे हैं, ऐसी ज़रूरतें जिन्हें बैंक या पब्लिक बॉन्ड मार्केट जैसे पारंपरिक वित्तीय चैनल अक्सर नियामकीय परेशानियों या कम जोखिम लेने की क्षमता के कारण पूरा नहीं कर पाते या करना नहीं चाहते।
प्राइवेट क्रेडिट अपने निवेशकों के लिए, आकर्षक जोखिम समायोजित विकल्प प्रदान करता है। दोनों तरफ से संवाद पर आधारित हस्तांतरण (ट्रांज़ैक्शन) में सावधानी से आकलन, नुकसान से बचाने के लिए डील और ट्रांज़ैक्शन के बाद की बारीकी से ट्रैकिंग की सुविधा मिलती है। पोर्टफोलियो बनाने में पूरी सावधानी के साथ पूल्ड व्हीकल के ज़रिए ऐसा करने से सार्वजनिक इक्विटी की तुलना में काफी कम उतार-चढ़ाव के साथ अच्छा रिटर्न मिल सकता है। यह फैमिली ऑफिस, एचएनआई, बीमा कंपनियों और संस्थागत निवेशक जैसे घरेलू निजी पूंजी प्रदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है, जो जोखिम समायोजित रिटर्न की तलाश में पोर्टफोलियो को विविधिकृत करना चाहते हैं।”
वीएएम ने पिछले ६ महीनों में, सड़क, वाहन, मीडिया, स्टील, स्वास्थ्य, वेयरहाउसिंग, वित्तीय सेवा और विमानन में निवेश किया है। इसकी निवेश पाइपलाइन में फार्मा, आतिथ्य, स्टील, उपभोक्ता उत्पाद और स्पेशलिटी केमिकल जैसे क्षेत्रों में पुनार्वित्तीकरण, हिस्सेदारी बढ़ाने, अधिग्रहण और वृद्धि पूंजी जैसे अलग-अलग प्रयोजन शामिल हैं।
भारत में इस परिसंपत्ति वर्ग ने २०२५ में १५.५ अरब अमेरिकी डॉलर (१.४ लाख करोड़ रुपये) (इंडिया प्राइवेट क्रेडिट: डील्स एंड रैंकिंग्स, वित्त वर्ष ‘२५; ऑक्टस) से अधिक का सौदा हासिल किया, जिससे स्पष्ट है कि यह वित्तीय परितंत्र में मुख्यधारा की चीज़ बनता जा रहा है।










