नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस में तकनीकी त्रुटियां पाई गईं। इसके बावजूद बिरला ने नोटिस को खारिज करने के बजाय उसमें सुधार करवाकर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश अपने सचिवालय को दिया। यह जानकारी लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने दी।
सूत्रों के अनुसार, नोटिस में उल्लिखित कुछ घटनाओं के संदर्भ में चार स्थानों पर वर्ष २०२६ के बजाय २०२५ लिखा गया था। नियमों के तहत इस आधार पर नोटिस को निरस्त किया जा सकता था।
विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव को यह नोटिस सौंपते हुए बिरला पर पक्षपातपूर्ण ढंग से सदन संचालन, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे आरोप लगाने तथा पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
सचिवालय सूत्रों ने बुधवार को बताया, “नोटिस में फरवरी २०२५ का उल्लेख चार बार किया गया है, जबकि संदर्भ २०२६ का है। नियमों के अनुसार इसे खारिज किया जा सकता था।”
उन्होंने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष ने सचिवालय को निर्देश दिया है कि त्रुटिपूर्ण नोटिस में आवश्यक संशोधन करवाकर उस पर कार्रवाई की जाए।” बिरला ने नियमों के तहत त्वरित प्रक्रिया अपनाने के निर्देश भी दिए।
सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत (९ मार्च) पर संशोधित नोटिस पर विचार किया जा सकता है। संशोधित नोटिस प्राप्त होने के बाद नियमानुसार उसकी जांच की जाएगी। यह भी कहा गया है कि मामले के निपटारे तक बिरला अध्यक्षीय आसन पर नहीं बैठेंगे।










