दार्जिलिंग: अलग राज्य गोरखालैंड की माँग को लेकर क्रांतिकारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (क्रामाकपा) के आह्वान पर नई दिल्ली के जंतर-मंतर में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह पहला अवसर नहीं है; क्रामाकपा इससे पहले भी दर्जनों बार राजधानी दिल्ली में इसी माँग को लेकर आवाज़ बुलंद कर चुकी है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने गोरखालैंड राज्य की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार द्वारा बार-बार दिए जा रहे आश्वासनों की पोल खोली। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार के शासन में गोरखा समुदाय पर दमन और उत्पीड़न दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान के प्रति उदासीन बनी हुई है।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब गोरखाओं की लोकतांत्रिक और संवैधानिक माँग दशकों से लंबित है, तब केंद्र सरकार आखिर किस दबाव में आकर इस मुद्दे को लगातार टाल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गोरखालैंड की माँग को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।








