नई दिल्ली: भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन चित्तरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (सीएनसीआई) ने विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर उपचार में रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी की जानकारी साझा की।
बुधवार को अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में सीएनसीआई के निदेशक डॉ. जयंत चक्रवर्ती ने बताया, “एक महिला अपर्णा सेन ने दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट में अपनी निजी इमारत दान की है, जहां कैंसर रिसर्च का कार्य किया जाएगा। साथ ही, सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर उपचार के लिए सीएनसीआई की ओर से आउटरीच क्लिनिक की शुरुआत की गई है।”
उन्होंने कहा कि कैंसर उपचार में पहली बार इस अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई है। राज्य में यह पहला सरकारी संस्थान है, जहां पूर्वी भारत के मरीज इस सुविधा के लिए आते हैं। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. सागर सेन, डॉ. द्विपान्विता बनर्जी, डॉ. शंकर सेनगुप्ता और डॉ. संदीप मंडल उपस्थित थे।
चिकित्सकों ने बताया कि अब तक २० रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। जिस संस्था के साथ संयुक्त रूप से काम किया जा रहा है, उसकी ओर से पहले १०० रोबोटिक सर्जरी निःशुल्क दी जा रही हैं, जबकि शेष के शुल्क तय किए जाएंगे। सरकार की ओर से यह भी पूछा गया है कि सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इस सेवा का विस्तार कैसे किया जा सकता है।
रोबोटिक सर्जरी के बारे में बताते हुए चिकित्सकों ने कहा कि लैप्रोस्कोपी में निरीक्षण हमेशा सटीक नहीं हो पाता, जबकि रोबोटिक सर्जरी में सूक्ष्म स्तर पर बेहतर दृश्यता मिलती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगले महीने ३डी लैप्रोस्कोपी परीक्षण के उपकरण लाए जाएंगे। वर्तमान में प्रतिदिन १० से १२ मरीजों की सर्जरी की जा रही है।
हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी चिंता जताई कि गर्भाशय के कैंसर के मामलों में हाल के दिनों में वृद्धि देखी जा रही है। निजी क्षेत्र में इस तकनीक का तेजी से उपयोग हो रहा है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।











