‘टीम इंडिया’ के रूप में भविष्य निर्माण में आत्मविश्वासी भारत की पुनः पुष्टि: सांसद हर्षवर्धन शृंगला का वक्तव्य

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नई दिल्ली: आज माननीय सांसद श्री हर्षवर्धन शृंगला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में भाग लेते हुए एक प्रभावशाली और व्यापक वक्तव्य दिया। उन्होंने आत्मविश्वासी वैश्विक नेता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका तथा देश के लिए सृजित हो रहे रूपांतरणकारी अवसरों को रेखांकित किया।
स्पष्टता और दृढ़ता के साथ बोलते हुए श्री शृंगला ने ऐतिहासिक भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को एक युगांतरकारी उपलब्धि बताया, जो भारतीय निर्यातकों, लघु उद्योगों, किसानों और श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करेगा। हाल ही में संपन्न भारत–यूरोपीय संघ साझेदारी समझौते, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “मदर ऑफ ऑल डील्स” के रूप में सराहा गया है, के साथ मिलकर भारत ने लगभग ६० ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के उच्च-स्तरीय बाज़ारों तक पहुँच सुनिश्चित की है, ऐसा उन्होंने उल्लेख किया। ‘इंडिया फर्स्ट’ सिद्धांत को मार्गदर्शक बनाकर कृषि और दुग्ध जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सफलतापूर्वक वार्ता का नेतृत्व करने के लिए उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक बधाई दी।
श्री शृंगला ने बताया कि भारत की औसत सीमा शुल्क दर घटकर १८ प्रतिशत हो गई है, जो ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, बांग्लादेश, मलेशिया, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों से कम है। यह तुलनात्मक लाभ तिरुपुर, कोयंबटूर, कोच्चि, सूरत, लुधियाना और सिलीगुड़ी जैसे श्रम-प्रधान विनिर्माण केंद्रों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेगा और ‘मेक इन इंडिया’, रोज़गार सृजन तथा एमएसएमई क्षेत्र को नई गति देगा, उन्होंने स्पष्ट किया।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में २१२ अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर मौजूद भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार इस वर्ष ३०० अरब डॉलर को पार कर जाएगा और अगले दो वर्षों में ५०० अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। सेंसेक्स में आई उल्लेखनीय तेजी और रुपये की मज़बूती भारत की आर्थिक दिशा के प्रति वैश्विक विश्वास को दर्शाती है। संसद में उनकी तथ्य-आधारित और संतुलित प्रस्तुति को परिपक्व आर्थिक कूटनीति के उदाहरण के रूप में व्यापक सराहना मिली।
ऊर्जा सुरक्षा के विषय में श्री शृंगला ने क्षेत्रीय अस्थिरताओं और आपूर्ति शृंखला जोखिमों से भारत को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक और विविधीकृत तेल खरीद की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। साथ ही ‘लचीलापन और सततता निर्माण’ की थीम पर आधारित ब्रिक्स में भारत के नेतृत्व के अंतर्गत हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु लचीलापन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़ी पहलों को भी उन्होंने उजागर किया।
आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट २०२६ के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत अब केवल नियमों का पालन करने वाला देश नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नियम निर्धारित करने वाला देश बनकर उभर रहा है। उनके वक्तव्य में वैश्विक प्रवृत्तियों और भारत के घरेलू विकास तथा तकनीकी भविष्य के बीच गहरी समझ परिलक्षित हुई।
अपने संबोधन के निष्कर्ष में श्री शृंगला ने दृढ़ शब्दों में कहा कि वर्ष २०२६ का भारत पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण, वर्तमान और भविष्य के बीच सेतु का निर्माण करने वाला राष्ट्र है। विश्व मंच पर सहभागिता के संदर्भ में राष्ट्रीय एकता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “एक संसदीय लोकतंत्र के रूप में हम जीवंत बहस कर सकते हैं, लेकिन जब भारत विश्व से संवाद करता है, तब हमें एक स्वर में, एक टीम के रूप में ‘टीम इंडिया’ आगे बढ़ना चाहिए।”
श्री हर्षवर्धन शृंगला के इस हस्तक्षेप को दूरदर्शी, राष्ट्रीय हित में निहित और राज्यनेतासुलभ बताते हुए व्यापक प्रशंसा की गई है, जिसने विदेश नीति, आर्थिक रणनीति और भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्हें एक सशक्त और प्रभावशाली आवाज़ के रूप में और अधिक सुदृढ़ किया है।

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