चिकन नेक कॉरिडोर को सुरक्षित करने के लिए अंडरग्राउंड रेल परियोजना

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नई दिल्ली: भारत सरकार ने उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है, को और अधिक सुरक्षित बनाने की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल के इस संवेदनशील क्षेत्र में भूमिगत रेल मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को बताया कि नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरे लगभग ४० किलोमीटर लंबे इस क्षेत्र में सुरक्षा और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने का प्रस्ताव है। यह परियोजना केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है।
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के महाप्रबंधक चेतन श्रीवास्तव के अनुसार, भूमिगत रेल खंड पश्चिम बंगाल के टिन माइल हाट से रंगपानी स्टेशन तक विकसित किया जाएगा। साथ ही बजट प्रस्तावों में इस पूरे मार्ग पर रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाकर चार करने की योजना भी शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत का एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है, जो आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। यह क्षेत्र अपने सबसे संकरे हिस्से में लगभग २०–२५ किलोमीटर चौड़ा है और किसी भी प्रकार की बाधा से संपूर्ण उत्तर-पूर्व की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भूमिगत रेल मार्ग का निर्माण आपातकालीन परिस्थितियों में भी निर्बाध परिवहन और सामरिक आवाजाही सुनिश्चित करने में सहायक होगा। यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक और बुनियादी ढांचा सुरक्षा नीति के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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