नई दिल्ली: केयरिंग माइंड्स इंटरनेशनल की संस्थापक एवं मनोचिकित्सक डॉ. मिनु बुधिया ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लंबे समय से निषिद्ध (टैबू) के रूप में देखा जाता रहा है, जिसके कारण इससे पीड़ित लोगों को सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने उल्लेख किया कि कई वर्षों तक अधिकांश परिवारों ने ऐसी समस्याओं को दबाकर रखा और मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से उपचार लेने वालों पर भी अपनी स्थिति और उपचार को गोपनीय रखने का दबाव बनाया।
प्रेस विज्ञप्ति पर दिए गए अपने वक्तव्य में डॉ. बुधिया ने कहा कि वह पिछले कई दशकों से इस नकारात्मक धारणा के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। केंद्रीय बजट में उत्तर भारत में ‘निमहैंस–२’ की स्थापना तथा रांची और तेजपुर में स्थित मौजूदा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष (एपेक्स) संस्थानों के रूप में उन्नत किए जाने की घोषणा ने उन्हें खुशी और आशा से भर दिया है।
अंत में डॉ. बुधिया ने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में और भी कई सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे देश के सभी नागरिकों को आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और सहयोग मिल सकेगा, ऐसा उन्होंने विश्वास व्यक्त किया।








