दार्जिलिंग: दार्जिलिंग लोकसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने सोशल मीडिया के माध्यम से दार्जिलिंग नगरपालिका के लिए स्वीकृत अमृत २.० परियोजना के कार्यान्वयन में हो रही लगातार देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहरलाल खट्टर को पत्र लिखकर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) शीघ्र तैयार करने तथा परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
सांसद बिष्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा अमृत १.० के तहत ₹२०४.८४ करोड़ की राशि आवंटित किए जाने के बावजूद दार्जिलिंग नगरपालिका क्षेत्र के निवासी आज भी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अप्रैल २०२५ में अमृत २.० के अंतर्गत विशेष रूप से दार्जिलिंग नगरपालिका के लिए अतिरिक्त ₹२९८.६० करोड़ की राशि स्वीकृत की थी। इसमें से ₹२३८.६० करोड़ पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए तथा सिञ्चेल झील में नए जलाशय के निर्माण हेतु ₹६०.०० करोड़ निर्धारित किए गए थे।
इतनी बड़ी धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अब तक डीपीआर तैयार करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई है और न ही परियोजनाओं के कार्यान्वयन में कोई ठोस प्रगति दिखाई दे रही है। इसे लेकर सांसद बिष्ट ने गहरी निराशा जताई। उनका कहना है कि इस तरह की निरंतर देरी से दार्जिलिंग नगरपालिका क्षेत्र के नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और शहरी अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई अमृत योजना के मूल लक्ष्यों को नुकसान पहुंच रहा है।
सांसद बिष्ट ने यह आरोप भी लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आवंटित धनराशि का दुरुपयोग कर उसे दक्षिण बंगाल में चुनावी खर्चों में लगा रही है।
मंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखी हैं—पहली, अमृत २.० के तहत स्वीकृत पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी और स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाए; और दूसरी, इन परियोजनाओं के शीघ्र एवं प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक केंद्रीय सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
सांसद बिष्ट ने दार्जिलिंग नगरपालिका क्षेत्र में अमृत २.० परियोजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन के पक्ष में लगातार आवाज उठाते रहने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “ये परियोजनाएं दार्जिलिंग के लोगों द्वारा लंबे समय से झेली जा रही गंभीर पेयजल समस्या के समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”










