राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र में विकसित भारत की तस्वीर पेश की

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र (२०२६-२७) के पहले दिन संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की। एक घंटे लंबे अभिभाषण में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, सामाजिक न्याय और सभी वर्गों के विकास पर विशेष जोर दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि २०१४ में सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ केवल २५ करोड़ नागरिकों तक ही पहुँच पाती थीं, जबकि अब लगभग ९५ करोड़ लोग इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने शताब्दी की पहली चौथाई अवधि को विकसित भारत की यात्रा का मजबूत आधार बताया और सामाजिक न्याय पर विशेष बल दिया।
संयुक्त सत्र सामान्यत: शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जब राष्ट्रपति ने मनरेगा के बजाय जी राम जी लागू करने का उल्लेख किया, विपक्ष ने विरोध किया और नारेबाजी हुई। कुछ मिनट के व्यवधान के बाद अभिभाषण फिर से सुचारू रूप से जारी रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने आर्थिक विकास, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल भारत की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से अग्रसर है और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
राष्ट्रपति ने संसद से राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से भारत विकास, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता के लक्ष्यों को प्राप्त करेगा।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार हर महिला को सम्मान, आत्मनिर्भरता और अवसर प्रदान करने के प्रयास में लगी है। उन्होंने “नमो ड्रोन दीदी” योजना का उदाहरण देते हुए बताया कि हजारों स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन पायलट प्रशिक्षण और ड्रोन दिए जा रहे हैं, जिससे वे कृषि और व्यवसाय में नई तकनीकों का लाभ उठा सकें।
साथ ही, “कृषि सखी” पहल के तहत ३०,००० से अधिक महिलाओं को आधुनिक कृषि पद्धतियों में प्रशिक्षित किया गया है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी भागीदारी देश की प्रगति के लिए आवश्यक है और वर्तमान योजनाएँ यही सुनिश्चित करती हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ें।

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